Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
INDORE महापौर-निगमायुक्त को बिल्डर की खुली चुनौती,नगर निगम के नोटिस के बाद भी जारी अवैध निर्माण,नेता... INDORE, IDA भू अर्जन विभाग, बाबू की जमकर मनमानी,ईश्वर सिंह परमार और बेटे की जुगलबंदी से आमजनता परेशा... INDORE शहर बनाएगा एक और रिकॉर्ड,सेग्रीगेशन WITH सेल्फी की महापौर- निगम कमिश्नर ने की शुरुआत। INDORE,IDA में लोकसूचना बना मज़ाक, व्यापक जनहित की बात, सैलेरी-संपत्ति का ब्यौरा देने में बहानेबाजी... INDORE माननीय न्यायालय के आदेशों के बावजूद,औपचारिकताएं कर रहा नगर निगम,PRJ OOH और सुपीरियर सर्विसेज ... INDORE कांड हो जाते हैं,जिम्मेदार समिति प्रभारियों को मिलती है छूट,कार्यवाही की बजाय महंगी गाड़ियां ... INDORE नगर निगम मार्केट विभाग की उदासीनता,खतरे में आमजनता की जान,मेयर का कहना PRJ OOH हो या सुपीरियर... INDORE नशे के खिलाफ एकजुट पूरा शहर,इंदौरी,क्रिकेटर,पूरे पुलिस विभाग ने नशे के खिलाफ लगाई दौड़। INDORE हवा में ही उड़ा ऑक्सीजन पार्क,अब एक पेड़ मां के नाम,नगर निगम की बजट खुटाओ योजना जारी,निगमायुक... INDORE न्यूज़ WITH तड़का डॉट कॉम की ख़बर का असर,टूटेगा दौलतगंज का अवैध निर्माण! महापौर सख़्त, किसी भी...

Women’s Reservation: ‘OBC कोटा और जाति जनगणना के बिना सब अधूरा’, प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण पर सरकार को घेरा

23

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने को भविष्य में होने वाले डिलिमिटेशन से जोड़ने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि सरकार सीटों की संख्या बढ़ाए बिना तुरंत कोटा क्यों नहीं लागू कर सकती? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दावे को चुनौती देते हुए कि किसी को भी अपनी कुर्सी जाने का डर नहीं है, प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर यह सच है, तो डिलिमिटेशन का इंतजार किए बिना रिजर्वेशन लागू करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए.

प्रियंका गांधी दोहराया कि बिल को जनता का सपोर्ट मिलने के बावजूद देरी से सरकार के इरादे पर चिंता पैदा होती है. उन्होंने चुनाव के दौरान सदन में बैठक पर भी सवाल उठाया प्रियंका गांधी ने लोकसभा में बोलते हुए महिला रिजर्वेशन फ्रेमवर्क में OBC रिप्रेजेंटेशन से जुड़ी चिंताओं को कम करके आंकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी कि इस मुद्दे को बाद में सुलझाया जा सकता है, ने एक बड़ी सामाजिक मांग को असल में एक टेक्निकल मुद्दे में बदल दिया. इस बात पर जोर देते हुए कि OBC समुदाय समाज के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है जिसका संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है, प्रियंका गांधी ने कहा कि उनके सही हिस्से की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसे गंभीरता से सुलझाया जाना चाहिए.

ओबीसी आरक्षण को लेकर प्रियंका ने उठाये सवाल

उन्होंने कहा, “आज, प्रधानमंत्री ने यूं ही कह दिया कि कुछ वर्गों की चिंताओं को बाद में सुलझाया जाएगा. वह किन वर्गों की बात कर रहे हैं? वह OBC समुदाय के बारे में बात कर रहे थे, कह रहे थे कि इस पर बाद में विचार किया जा सकता है. इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए…यह समाज के एक बड़े हिस्से, उनकी कड़ी मेहनत और उनके लंबे संघर्ष को दर्शाता है. इसे टेक्निकल मुद्दा कहकर, उन्होंने मामले को टालने की कोशिश की है. हम उनकी मांगें उठा रहे हैं और उनकी जरूरतों को हाईलाइट कर रहे हैं, यह कहते हुए कि वे भी अपने सही हिस्से के हकदार हैं। लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे एक टेक्निकल मुद्दा बना दिया है.”

प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने पार्लियामेंट में अपने भाषण में इस कानून के बारे में अधूरा ब्यौरा दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ऐसे बोल रहे थे जैसे बीजेपी ने लंबे समय से इस बिल को सपोर्ट किया हो, जबकि उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इसका क्रेडिट नहीं लिया. प्रियंका गांधी ने यह भी बताया कि राहुल गांधी ने 2019 में पहले भी प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर महिला आरक्षण बिल को लागू करने की अपील की थी, जिससे इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी के पहले के दबाव का पता चलता है.

परिसीमन को लेकर सरकार को घेरा

पीएम किस बात से घबरा रहे हैं. ये वर्ग कितना मजबूत और बड़ा है और उसके हक को कोई नकार नहीं कर पाएगा. पीएम ओबीसी का हक छीनना चाहते हैं. उनके साथ बड़ा अन्याय करना चाहते हैं. कांग्रेस नहीं करने देंगे. किसी एक का हक छीन कर इसे नहीं चलाया जा सकता.

उन्होंने कहा कि संसद का 50 फीसदी विस्तार प्रस्तावित है, लेकिन कोई नियम नहीं लिखा है. संसद में हर प्रदेश की भागीदारी निश्चित की गयी थी, लेकिन इसमें बदला जा रहा है. संसद में प्रदेशों के प्रतिनिधित्व परिवर्तन किया जाएगा. जिस तरह से असम में मनचाही सीटों को काटा और राजनीतिक फायदे के लिए नई सीमाएं बनाई. उसी तरह से पूरे देश में करेंगे. परिसीमन आयोग में चुने गए तीन लोग लोगों की भागीदारी तय करेंगे. अब लोकतंत्र पर खुला वार हो गया. यदि यह विधेयक पारित होता है, तो लोकतंत्र पूरा खत्म हो जाएगा. देश की अखंडता पर हमला किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि विपक्षी दल के नेता करते नहीं है. ऐसा माहौल बनाया जा रहा है. मोदी को सबको साथ देना चाहिए और यह करके विपक्ष को धर्मसंकट में डाल देते हैं. एक तरफ महिला आरक्षण. दूसरी तरफ काट-पीट करने और ओबीसी वर्ग को नकारने की स्वतंत्रता. महिला आरक्षण को सत्ता में बनाए रखने का कमजोर बहाना बनाया. ऐसी संसद बनाना चाहते हैं जहां पिछड़े वर्गों और प्रतिनिधित्व का अभाव होगा.

महिला आरक्षण को लेकर बताया कांग्रेस का इतिहास

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि पंचायतों और नगर पालिकाओं में 33 परसेंट रिजर्वेशन का प्रोविजन सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पेश किया था. उन्होंने कहा कि यह कदम जमीनी स्तर पर महिलाओं की पॉलिटिकल हिस्सेदारी को आगे बढ़ाने में एक अहम कदम है.

उन्होंने कहा, “पंचायतों और नगर पालिकाओं में 33 परसेंट रिजर्वेशन का प्रोविजन सबसे पहले स्वर्गीय राजीव गांधी के नेतृत्व वाली इंडियन नेशनल कांग्रेस सरकार ने सदन में पेश किया था.

प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारत में महिलाओं के पॉलिटिकल अधिकारों की ऐतिहासिक जड़ों के बारे में भी बताया और कहा कि इसकी नींव आजादी के आंदोलन के दौरान रखी गई थी. उन्होंने मोतीलाल नेहरू की 1928 की रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें फंडामेंटल राइट्स की लिस्ट थी और सरदार पटेल की अध्यक्षता में कांग्रेस के 1931 के कराची सेशन का, जहां महिलाओं के समान अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई थी.

स्वतंत्रता से पहले की बताई कहानी

उन्होंने आगे कहा कि एक वोट, एक नागरिक, एक मूल्य का सिद्धांत भारत के पॉलिटिकल फ्रेमवर्क में शुरू से ही शामिल था, और महिलाओं के रिज़र्वेशन को दुनिया भर में एक महत्वपूर्ण और आगे बढ़ने वाला कदम बताया.

उन्होंने कहा, “रूलिंग पार्टी में मेरे साथियों को यह पसंद नहीं आ सकता है, लेकिन ऐतिहासिक बैकग्राउंड यह है कि इसे भी नेहरू नाम के एक आदमी ने शुरू किया था, लेकिन चिंता न करें, यह वह नेहरू नहीं है जिससे आप इतना शर्माते हैं. उनके पिता, मोतीलाल नेहरू ने 1928 में एक रिपोर्ट तैयार की और उसे कांग्रेस पार्टी की वर्किंग कमेटी के सामने पेश किया. उसमें उन्होंने 19 फंडामेंटल राइट्स की लिस्ट बनाई थी. 1931 में, सरदार पटेल की अध्यक्षता में कराची में कांग्रेस का सेशन हुआ था.”

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!