INDORE कांड हो जाते हैं,जिम्मेदार समिति प्रभारियों को मिलती है छूट,कार्यवाही की बजाय महंगी गाड़ियां और कैबिन,आखिर अव्यवस्थाओं के सिर्फ अधिकारी ही जिम्मेदार!
इंदौर नगर निगम महापौर परिषद सदस्य भाग एक,,,,
फर्जी नामांतरण घोटाला, यूनिपोल, लॉलीपॉप मार्केट विभाग मामला,भागीरथपुरा कांड या जलजमाव की हो बात,जनकार्य,जलकार्य और राजस्व समिति प्रभारियों को छूट क्यों?कांड होते रहते है, चंद लोगों पर कार्यवाही होते हुए हो जाती है रस्मदायगी,अधिकारियों पर लगाम नहीं, क्यों तय नहीं होती जिम्मेदारी। हमेशा रडार से बाहर समितियों के प्रभारी।



✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

इंदौर नगर निगम में जन कार्य विभाग,जल कार्य और इन सभी में से सबसे अहम यानी निगम राजस्व विभाग। जो कि नगर निगम को आय दिलवाने का काम करता हैं। लेकिन इनसे संबंधित कोई भी कांड, घोटाला या अनियमितता उजागर होती है तो मात्र चंद लोगो पर कार्यवाही करते हुए सिर्फ रस्म निभाई जाती हैं। मगर इन ऐसी समितियों के प्रभारियों पर कोई भी गाज नहीं गिरती हैं। अब बात करे भागीरथपुरा कांड की तो खुद निगमायुक्त दिलीप यादव नापे गए। लेकिन उनके अलावा इंदौर नगर निगम की बड़ी बड़ी गाड़ियों के मजे लेने वाले जिम्मेदार समिति प्रभारियों का इसमें नहीं नपना ,उनकी जिम्मेदारी तय नहीं होना।

कई बड़ी विसंगतियों के सवाल खड़े करता हैं। इनमें से ही इंदौर नगर निगम के राजस्व अमले की बात कि जाए तो फिलहाल जो अमले के हालात चल रहे हैं। वह किसी से छुपे नहीं हैं। चाहे सम्पत्तिकर,जलकर,या अन्य कोई टैक्स इसमें भी राजस्व अमला सबसे पिछड़ा हुआ ही हैं।

वह इसलिए क्योंकि कुल एक लाख लोगों से ज्यादा के तो खाते ही नहीं खुले हुए हैं। जबकि इसी विभाग की बात की जाए तो मार्केट विभाग, और नामांतरण घोटाला फिलहाल जमकर छाया हुआ हैं। वही कर भुगतानों की बात की जाए तो वहीं लोग करों का भुगतान करते है। जो जमा करते आ रहे हैं। इधर नगर निगम मार्केट विभाग की वजह से नगर निगम को अच्छा खासा घाटा सहना पड़ रहा हैं। या कहे तो राजस्व विभाग के निकम्मी फ़ौज और सरदार की वजह से निजी हाथों में तो जमकर कमाई और मलाई जा रही है।

लेकिन निगम में ठन ठन गोपाल जैसे हालात बन गए हैं। हाल ही में चर्चित नामांतरण घोटाला इसका साक्षात उदाहरण हैं। बात तो यहां तक कि जा रही है कि साजिश की यह मात्र पहली परत खुली हैं। और मात्र कुल 347 फर्जी नामांतरण की ही जानकारी सामने आ पाई हैं। खैर इसके अलावा मार्केट विभाग और यूनिपोल, लॉलीपॉप मामला। जिसमें साल 2021 से अभी तक खुद नगर निगम कई बार PRJ OOH,सुपीरियर सर्विसेज एडवरटाइजिंग कंपनी को चेतावनियां तो देती आ रही हैं। लेकिन नियमों का पालन आज तक भी नहीं हो पा रहा हैं। लिहाजा अब यह कहना गलत नहीं होगा कि किस काम की ऐसी समितियां और इसके प्रभारी। क्योंकि यह निगम की महंगी गाड़ियों,आलीशान केबिनों की सजावट में खर्च करने में ही लगे हुए हैं। न कि निगम और जनता के कुछ भले के लिए।

हर बार सिर्फ समिति प्रभारियों को छूट क्यों,कार्यवाही होती नहीं!

इंदौर नगर निगम में फिलहाल चर्चित नामांतरण घोटाला अपने आप में अधिकारियों,और भोपाल तक की किरकिरी की वजह बन गया हैं। जबकि उक्त मामले को लेकर बताया जा रहा है कि उक्त इतने बड़े कांड में बिना राजनीतिक सहयोग के इतना बड़ा कांड होना असंभव हैं। खैर हम बात कर रहे है राजस्व समिति प्रभारी निरंजनसिंह चौहान की तो। उन्हें लेकर कोई जिम्मेदारी तय नहीं होना बड़ा सवाल खड़े करता हैं क्योंकि जब MIC सदस्य ही सो रहे हैं। और उनके विभाग में फर्जी नामांतरण कांड हो जाए। यह हजम नहीं होने जैसी बात हुई हैं। क्योंकि अधिकारियों के साथ साथ सत्ता पक्ष के इन नुमाइंदों की भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती हैं क्योंकि अधिकारी आते जाते रहते है लेकिन यह जनप्रतिनिधि तो शहर के ही हैं।
भागीरथपुरा कांड सब दायरे से बाहर।

इसके अलावा भागीरथपुरा कांड की बात की जाए तो यहां 36 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। जबकि कई लोगों ने अस्पतालों में नारकीय जीवन जिया हैं। मगर इस पूरे मामले में निगमायुक्त दिलीप यादव के अलावा कोई भी ऐसे जिम्मेदारों को नहीं नापना बहुत से सवाल खड़े कर देता हैं। जबकि जल कार्य समिति प्रभारी अभिषेक बबलू शर्मा की भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती है जितनी तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव की थी। न ही स्थानीय पार्षद पर कोई आंच आयी।
जन कार्य विभाग।

जन कार्य विभाग की कारस्तानियो की वजह से तो खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी आम जनता की खरी खरी सुन चुके हैं। क्योंकि शहर में जलजमाव हो,या निर्माण हो चुके सड़क,पेवर का दोबारा निर्माण उक्त विभाग हमेशा से ही चर्चाओं में रहा हैं। लेकिन उक्त जन कार्य विभाग की इन कारस्तानी पर न ही कभी लगाम लगी है और न ही वर्तमान जन कार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौड़ पर कोई गाज गिरी। यूँ भी बताया जा रहा है कि इंदौर नगर निगम का जन कार्य विभाग शहर के विकास की अपेक्षा वहां काम कर रहा है जहां इंदौर नगर निगम की सीमा भी नहीं हैं। खैर पिछले वर्ष भी शहर में बारिश ने भयंकर तबाही मचाई। कई लोगों ने जाने तक गंवाई। लेकिन ठीकरा हमेशा अधिकारियों पर फोड़ना। कहा तक सही बात हुई।
आगे इंदौर नगर निगम की अन्य समितियों और उनके प्रभारियों की जिम्मेदारी की पोल खोलती यह खबरें जारी रहेगी।