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आगे पाठ पीछे सबकुछ सपाट,वर्षाजल संरक्षण की जनता से उम्मीद,जबकि खूब नगर निगम भुला अपनी जिम्मेदारी

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आगे पाठ पीछे सपाट,वर्षाजल संरक्षण,खुद अपनी ही योजनाओं में नहीं कोई सिस्टम,जनता से कोरी अपील।

 

अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार

इंदौर।
नगर निगम इस वक्त पूरी तरह इवेंट कंपनी में तब्दील हो गया हैं। रोजाना कार्यक्रम के नाम पर कोई न कोई आयोजन। लेकिन उसके बावजूद भी आगे का पाठ और पीछे सबकुछ सपाट। इसी तर्ज पर नगर निगम के जिम्मेदारों की कार्यशैली जारी हैं। इधर अब निगम की और से महापौर पुष्यमित्र भार्गव वर्षाजल संरक्षण को लेकर जगह जगह ढोल पीट रहे हैं। लेकिन मेयर की उम्मीद सिर्फ आम जनता से ही हैं,और सख्ती भी। लेकिन नगर निगम खुद अपनी ही योजनाओं में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना भूल गया हैं। लिहाजा यह कहना गलत नहीं होगा कि गुड खाने की आदत रखने वाले अब शहरवासियों को गुड न खाने की सलाह दे रहे हैं। इधर अब इवेंट के अलावा भी शहर में बहुत से कार्य हैं। जिन्हें लेकर जिम्मेदारों के मुंह में दही जम जाता हैं।

42 घंटे महाजाम, लेकिन कोई फर्क नहीं।

शहर में फिलहाल यातायात के मामले में लोगों की बैंड बजी पड़ी हैं। इंदौर भोपाल सड़क मार्ग 42 घंटे तक वाहन चालकों के लिए खुली जेल साबित हुआ। लेकिन फिर भी शहर के जिम्मेदार इवेंट में मशगूल मिले। उन्हें शहर की यातायात व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं हैं। उल्टे उनकी उम्मीदें जनता से हैं।

जनता को ज्ञान,आप क्या करेंगे श्रीमान

इधर जैसे ही शहर के अलग अलग क्षेत्रों से जाम की खबरें आना शुरू होती हैं। उसके बाद महापौर के ईद गिर्द घूमने रहने वाले। जनता को ज्ञान देना शुरू कर देते हैं। जनता के सामने उम्मीदों की झोली फैला देते हैं। जबकि जिम्मेदार घर बैठ कर सिर्फ तमाशा देखते हैं।

आखिर क्यों है जाम।
दरअसल यह नगर निगम में ही पूर्व में काबिज उन अफसरों के अल्प ज्ञान और सिर्फ कमाई पर जोर देने का नतीजा है। जिसकी वजह से शहर फिलहाल जाम की बीमारी से ग्रस्त हैं। इसके अलावा अभी भी हालात कुछ नहीं हैं। शहर का ऐसा कोई मार्ग नहीं है जहां अवैध कब्जे,सड़को पर कब्जे,बेतरतीब वाहन,बिना पार्किंग के भवन,बहुमंजिला न हो। जिसकी वजह से शहर में जाम के हालत बिगड़ते जा रहे हैं।

बेसमेंट में पार्किंग की बजाय दुकानें

शहर की 99.9 प्रतिशत बहुमंजिलाओं,कर्मशियल कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट में पार्किंग की बजाय दुकानें,बेखौफ संचालित हो रही हैं। समय समय पर जिम्मेदार नगर निगम झूठी कार्यवाही का ढोल पीटता जरूर हैं। लेकिन यह ढोल हमेशा की तरह फुटा हुआ साबित हो जाता हैं।

प्रभावी कदम की बजाय,न जाने कहा है ध्यान।

इधर नगर निगम के जिम्मेदारों जिनमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव से लेकर कमिश्नर शिवम वर्मा तक का प्रभावी कार्यवाही ठोस कदम उठाने की बजाय ध्यान कहां हैं। किसी को कुछ पता नहीं हैं। 

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