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US Oil Export: दुनिया के तेल बाजार पर फिर होगा अमेरिका का कब्जा, दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार बनेगा नेट एक्सपोर्टर

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ईरान और इजराइल के बीच जंग अभी जारी ही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बयान दिए जा रहे हैं कि जल्द पूरी तरीके से युद्ध रुक जाएगा. इसी बीच यूएसए के लिए एक बढ़िया खबर सामने आ रही है. पिछले हफ्ते अमेरिका लगभग पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कच्चे तेल का नेट एक्सपोर्टर बनने के करीब पहुंच गया.

एशियाई और यूरोपीय खरीदारों की मांग को पूरा करने के लिए शिपमेंट रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था. ये खरीदार ईरान युद्ध के कारण मध्य पूर्व से रुकी हुई सप्लाई की जगह लेने के लिए तेजी से दूसरे विकल्प ढूंढ रहे थे, जिसका सीधा फायदा अमेरिका को मिला. अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ युद्ध ने ग्लोबल ऊर्जा बाजार में अब तक की सबसे बड़ी हलचल मचा दी. शिपिंग को लेकर ईरान की धमकियों के कारण दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की तेल और गैस सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना बंद हो गई.

ग्लोबल टेंशन से मिला फायदा

एशिया और यूरोप के रिफाइनर, जो इस सप्लाई पर निर्भर हैं. जहां से भी संभव हो सका, वहां से दूसरी खेप खरीद रहे हैं. इससे दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक, अमेरिका से तेल की मांग में भारी उछाल आया है. हालांकि, विश्लेषकों और व्यापारियों का कहना है कि अमेरिका तेजी से अपनी निर्यात क्षमता के करीब पहुंच रहा है.

1943 के बाद पहली बार बनेगा निर्यातक

बुधवार को जारी अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले हफ्ते कच्चे तेल का नेट इंपोर्ट यानी आयात और निर्यात के बीच का अंतर घटकर 66,000 बैरल प्रतिदिन रह गया. यह 2001 से उपलब्ध साप्ताहिक आंकड़ों में अब तक का सबसे निचला स्तर है. वहीं, निर्यात बढ़कर 5.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया, जो सात महीनों में सबसे अधिक है. आंकड़ों से पता चलता है कि सालाना आधार पर, अमेरिका आखिरी बार 1943 में कच्चे तेल का शुद्ध निर्यातक था.

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

रयस्टैड के तेल बाजार मामलों के उपाध्यक्ष, जानिव शाह ने कहा कि अमेरिका के बढ़ते कच्चे तेल के निर्यात से यह साफ होता है कि अटलांटिक क्षेत्र और एशियाई खरीदार उपलब्ध सप्लाई के लिए दूर-दूर तक पहुंच बना रहे हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में तेल की कीमतों के अंतर के कारण शिपिंग की लागत भी निकल जाती है.

हाल के महीनों में ग्रीस जैसे देशों ने पहली बार अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद की है. शिप ट्रैकिंग सेवा ‘Kpler’ के अनुसार, पिछले हफ्ते अमेरिका के कुल निर्यात का लगभग 47%, यानी 2.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल यूरोप की ओर भेजा गया. वहीं, लगभग 37% यानी 1.49 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल एशिया की ओर गया. यह आंकड़ा एक साल पहले के 30% से अधिक है.

अमेरिका का सबसे अच्छा पार्टनर

अमेरिका के कच्चे तेल के टॉप खरीदारों में नीदरलैंड, जापान, फ्रांस, जर्मनी और दक्षिण कोरिया शामिल थे. Kpler के डेटा के अनुसार, 500,000 बैरल कच्चे तेल से भरा एक जहाज तुर्की की ओर जाते हुए दिखा. यह कम से कम एक साल में अमेरिका का उस देश को पहला निर्यात होगा.

निर्यात क्षमता के करीब

Kpler के विश्लेषक मैट स्मिथ ने कहा कि अप्रैल में अमेरिका का निर्यात लगभग 5.2 मिलियन bpd तक पहुंचने की संभावना है. उन्होंने आगे कहा कि महीने के हिसाब से निर्यात अपनी अधिकतम सीमा के करीब पहुंच रहा है. व्यापारियों और विश्लेषकों ने कहा कि सीमित पाइपलाइन क्षमता और जहाजों की उपलब्धता को देखते हुए, अमेरिका अधिकतम 6 मिलियन bpd तक निर्यात कर सकता है.

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