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नवंबर का सुप्रीम कोर्ट का आदेश,शहरभर में आवारा श्वानों का आतंक,अब कहीं जाकर जागा इंदौर नगर निगम,लेकिन नसबंदी घोटाले पर जिम्मेदारों ने अभी भी साधी चुप्पी

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नवंबर का आदेश,शहर में आवारा श्वानों का आतंक,अब जाकर जागा इंदौर नगर निगम।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

देश की सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के नवंबर में दिए गए आदेशों के बावजूद इंदौर नगर निगम के कर्ताधर्ताओं के कानों में जूं तक रेंगी,और जब शहरभर में प्रतिदिन 200 के लगभग डॉग बाइट के मामले आने लगे तब कहीं जाकर इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने का याद आया हैं। दरअसल इंदौर नगर निगम द्वारा शहरभर में हिंसक हो रहे आवारा श्वानों के शेल्टर हाउस के लिए अब कहीं जाकर निविदा सूचना जारी कर दी हैं। लेकिन अभी भी नसबंदी में किए गए घोटालों को लेकर जिम्मेदार चुप हैं। यहीं नहीं जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपयों की बंदरबांट को लेकर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल हो या फिर खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव दोनों ने ही चुप्पी साधे रखी हैं।

पहले से एनजीओ ने हथिया रखी जमीनें।

दरअसल शेल्टर हाउस को लेकर इंदौर नगर निगम अब कहीं जाकर जागा हैं। लेकिन वर्षों से शहरभर में कुछ तथाकथित NGO ने इन्हीं डॉग्स को लेकर बेशकीमती जमीनें हथिया तो रखी है। लेकिन फिर भी शहरभर में आवारा श्वानों की क्या स्थिति हैं। यह किसी से छुपी नहीं हैं। जबकि आमजनता ऐसे आवारा और पागल हो रहे श्वानों का शिकार हो रही हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का भी ख्याल नहीं।

इधर देश की सर्वोच्च अदालत ने इंदौर नगर निगम सहित दिल्ली सहित अन्य राज्यों को आवारा श्वानों को लेकर आदेश दिए थे कि ऐसे श्वानों को रहवासी क्षेत्रों,सार्वजनिक स्थानों से अलग करते हुए शेल्टर हाउस में शिफ्ट किया जाए। ताकि श्वानों की भी उचित देखभाल की जाए लेकिन लगभग चार महीने बीत जाने के बाद और शहरभर में श्वानों के आतंक के बावजूद अब कहीं जाकर इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों की नींद खुली हैं।

इंदौर हाईकोर्ट भी लगा चुका है फटकार

इधर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के साथ ही इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ से भी इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों को फटकार लगाई जा चुकी हैं। लेकिन इंदौर नगर निगम के जिम्मेदार को समय रहते जागने की कभी आदत पड़ी ही नहीं हैं।

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