INDORE लापता खजराना अस्पताल,धरातल पर खाली जमीन,अब कांग्रेसी नेता का दावा कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने दी थी स्वीकृति,लेकिन भाजपा सरकार-अधिकारियों ने नहीं किया कुछ काम।
लापता खजराना हॉस्पिटल,और पगार लेने वाला स्टॉफ,अब कांग्रेसी नेता सत्तु पटेल ने स्टोरी में लाया ट्विस्ट, कहां कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने की थी कांग्रेसियों की मांग हुई थी पूरी,जमीन आवंटन हुआ लेकिन 100 बेड वाला अस्पताल, भाजपा सरकार-अधिकारी बना नहीं पाए आजतक, और हुआ जमकर भ्रष्टाचार!

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।
“कागजों पर अस्पताल धरातल पर खाली जमीन” इंदौर का ये वाकया तो लगभग अब विश्व प्रसिद्ध हो गया है। लेकिन अब इस विश्वप्रसिद्ध लापता खजराना अस्पताल को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल ने इस अस्पताल की कहानी में और एक और बड़ा ट्विस्ट ला दिया हैं। दरअसल वह इसलिए कि कांग्रेसी नेता सत्तू पटेल ने दावा किया है कि उक्त अस्पताल की मांग उन्होंने और अन्य खजराना क्षेत्र के कांग्रेसियों ने 15 महीने की सरकार के मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ से की थी। और उन्होंने हाथोंहाथ उक्त अस्पताल की स्वीकृति देते हुए जमीन तक आवंटित कर दी थी। लेकिन सरकार गिरी और प्रदेश में दोबारा भाजपा सरकार बन गई और खजराना हॉस्पिटल बस कागजों तक सिमटकर रह गया और धरातल पर खाली जमीन अब भाजपा सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों को मुंह चिढ़ा रही हैं।

हम गए थे मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने,
चर्चा में कांग्रेसी नेता सत्तू पटेल ने कहा कि खजराना में 100 बेड वाले हॉस्पिटल की मांग इंदौर उनके इंदौर से भोपाल गए प्रतिनिधिमंडल ने की थी। लिहाजा तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खजराना हॉस्पिटल के लिए उसी वक्त स्वीकृति दे दी थी। और लेकिन भाजपा सरकार ,मुख्यमंत्री और अधिकारियों ने इस हॉस्पिटल को लेकर कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई थी। और तो और भाजपा शासन में जमीन आवंटन हो जाने के बावजूद स्थानीय कांग्रेसियों को अन्य खानापूर्ति करने में पसीने छूट गए थे। और अब यह अस्पताल कागजों पर चल रहा है। सत्यनारायण पटेल ने कहा कि जनता के मेहनत से जुटाई जा रही राशि का भुगतान भी नदारद कर्मचारियों को हो गया।

जिला अस्पताल में लगे 9 साल,अब खजराना हॉस्पिटल कब होगा तैयार?
इधर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव हाल ही में इंदौर में पिछले कई सालों से पिछड़े जिला अस्पताल का शुभारंभ कर गए थे। लेकिन उक्त अस्पताल में मात्र गायनिक वार्ड ही शुरू होना। इस पूरे मामले को लेकर भी सत्यनारायण पटेल ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव पर तंग कसा कि खजराना हॉस्पिटल कब कागजों से जमीन पर उतरेगा। पटेल ने कहा कि संभावनाएं बहुत कम लगती है क्योंकि जिला अस्पताल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।