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खंडवा में कलयुगी मां और बाप,दोनों ने असहाय बेटे को समझा,सिर्फ मुसीबत, मां आती नहीं,पिता भी दादी को घर खर्च देकर हो जाते रफूचक्कर।

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कलयुगी मां ने दिव्यांग बेटे को मां की ममता से किया वंचित — बुजुर्ग दादी ने लगाई शासन-प्रशासन से मदद की गुहार

 

खण्डवा जिले के पुनासा के निकट ग्राम काल्याखेड़ी से एक दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है।
ग्राम निवासी श्यामा बाई ने बताया कि उनके बेटे सुभाष मोरे की शादी (लवमैरिज) कुछ वर्ष पूर्व सीमा केवट से हुई थी, जो कृषि उद्यानिकी विभाग में नौकरी करती है। इस दंपती के एक बेटा और एक बेटी हैं। शादी के कुछ साल बाद दोनों पति-पत्नी अलग रहने लगे। और दोनों ही सरकारी नौकरी करते है। श्यामा बाई ने बताया कि उनका पोता दिव्यांश उम्र 8 वर्ष शारीरिक रूप से विकलांग है। उसकी बुद्धि तो सामान्य है, लेकिन वह चल-फिर नहीं सकता, न ही बिना सहारे के बैठ या करवट बदल सकता है। जन्म के बाद से ही उसे मां का प्यार नहीं मिल पाया। उसकी मां न तो उससे मिलने आती है और न ही फोन पर बात करती है। पिता भी कभी-कभार खर्चा देकर चले जाते हैं। वह दूसरे बच्चों को देखकर मां के प्यार को तरसता है कुढ़ता, कल्पता है, कुंठित होता रहता है लेकिन दिव्यांश इन बातों के लिए विवश है उसके मां बाप के आपसी मनमुटाव की भेंट बेचारा बालक चढ़ गया।
मां ने एक बालिका लालन पालन के लिए ले ली और पिता ने दिव्यांश को लेकिन इस मामले के बाद मां कभी मिलने नहीं आई ना ही कभी बात की। दादी ने बताया कि इस उम्र में भी पोते की देखभाल पूरी तरह उनके भरोसे है। उनकी खुद की उम्र अब सेवा के लायक नहीं रही और न ही अब कहीं काम पर जा सकती हैं। ऐसे में न तो वह बच्चे की उचित देखभाल कर पा रही हैं, और न ही खुद का गुजारा कर पा रही हैं।

श्यामाबाई, दिव्यांश की दादी,

दिव्यांश, पीड़ित बालक।

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