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MP School News: सरकारी शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस पर सरकार सख्त; नेटवर्क विहीन स्कूलों की मांगी गई जानकारी

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भोपाल: मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए अब नेटवर्क न होने का बहाना बनाकर ऑनलाइन अटेंडेंस से बचने का रास्ता बंद होने वाला है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर में उन स्कूलों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है, जहाँ नेटवर्क की समस्या रहती है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को पत्र लिखकर ऐसे स्कूलों और वहां कार्यरत शिक्षकों का पूरा ब्योरा मांगा है।

📊 ऑनलाइन अटेंडेंस से बचने का हथकंडा

राज्य सरकार ने शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन अटेंडेंस की व्यवस्था लागू की थी। हालांकि, कई शिक्षक अक्सर ‘नेटवर्क न होने’ का हवाला देकर इसे नजरअंदाज करते रहे हैं। स्थिति यह है कि कई स्कूलों में शिक्षकों ने अब तक ऑनलाइन अटेंडेंस ही नहीं लगाई है। पूर्व में सैलरी रोकने की चेतावनी के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी थी, जिसे देखते हुए अब विभाग ने सख्ती बढ़ाने का निर्णय लिया है।

📋 डेटा जुटाने के पीछे का मकसद

15 जून से शुरू होने वाले नए शिक्षण सत्र के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों से शिक्षकों की संख्या, रिक्त पदों, सेवानिवृत्त/मृत शिक्षकों और जनगणना कार्य में संलग्न शिक्षकों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस डेटा का उद्देश्य केवल अटेंडेंस ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना है।

🔄 नेटवर्कविहीन स्कूलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

स्कूल शिक्षा विभाग के डायरेक्टर के.के. द्विवेदी के अनुसार, “जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर ऐसे स्कूलों को चिन्हित किया जाएगा जहाँ वास्तव में नेटवर्क की समस्या है। ऐसे स्कूलों के लिए अटेंडेंस की वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन स्कूलों में नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध है, वहां ऑनलाइन अटेंडेंस को किसी भी हाल में सख्ती से लागू किया जाएगा। अब शिक्षकों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तकनीकी बाध्यताओं को पूरा करना होगा।

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