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इंदौर नगर निगम में वर्षो से जारी फर्जी नोटिसों का खेल, क्या जांच में आयेंगे शामिल जिम्मेदारों के नाम ?

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नगर निगम में चल रहा फर्जी नोटिस का खेल,एक जिन्न आया बाहर,सामने आयेंगे वसूलीबाज सफेद चेहरे।

 

अमित कुमार त्रिवेदी 

इंदौर।
नगर निगम में पिछले लंबे समय से फर्जी नोटिसों का खेल जारी है। जिसमें मार्केट विभाग,भवन अनुज्ञा,राजस्व विभाग,रिमूवल अमला जैसे मुख्य विभागीय अमला शामिल हैं। दरअसल यह खेल कोई पुराना नहीं हैं। पिछले कई सालों से प्रशासनिक कसावट के दावों के बीच यह फर्जी नोटिस का खेल बदस्तूर जारी हैं। जिसके चलते प्रतिमाह लाखों की वसूली भी होती हैं। लेकिन जिम्मेदार या जानकार अनजान है या उनके नीचे क्या खेल चल रहा है इसकी भनक उनको भी नहीं हैं।

फर्जी बिल भुगतान मामला
नगर निगम में पिछले महीनों फर्जी बिल भुगतान मामला पकड़ में आया था। जिसके चलते करीब 150 करोड़ तक के फर्जी बिलों का भुगतान नगर निगम लेखा शाखा से हो गया था। लेकिन मामला बढ़ता देख खुद जिम्मेदारों ने ही यह मामला दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी फिलहाल उक्त मामला कब्र में दफन तक कर दिया गया हैं।

चेतन पाटिल कागजों पर पौधे।

इधर इसके अलावा EOW के हत्थे चढ़े चेतन पाटिल मामले में भी करीब पांच करोड़ के पौधे खरीदी मामला उजागर हो चुका है। अब उक्त मामले में ही नगर निगम के ऑडिट विभाग,लेखा विभाग और जिम्मेदार अन्य बड़े अफसर और नेता शामिल न हो यह हो नहीं सकता है। लेकिन इस मामले को भी सिर्फ चेतन पाटिल पर कार्यवाही करते हुए दबा दिया गया। उक्त मामले में न ही महापौर और न ही निगम कमिश्नर ने आगे की जांच करना उचित नहीं समझा। लिहाजा इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार किस हद तक कायम हैं।

यह है मामला,पीड़ित नहीं आता तो इसमें भी हो जाता बड़ा खेला

दरअसल नगर निगम के तथाकथित अपर आयुक्त के नाम से अशोक कुमार बत्रा, वरुण बत्रा,और मयंक बत्रा के नाम से नोटिस जारी किया गया था। जिसमें लगभग साढ़े सात लाख रुपए जमा करने का उल्लेख किया गया था। अगर यह तीनों ही पीड़ित पक्ष जनसुनवाई में नहीं पहुंचते तो इसमें भी बड़ा खेला होना तय माना जा रहा था। उक्त मामले में भी आउट सोर्स कर्मचारी के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे है लेकिन क्या यह भी संभव है कि इंदौर नगर निगम के किसी बड़े जिम्मेदार के स्पोर्ट के बिना तथाकथित कर्मचारी ऐसे नोटिस जारी कर देवे। फिलहाल इस मामले ने जरूर निगमायुक्त शिवम वर्मा जांच के आदेश दे चुके हैं लेकिन जांच की आंच किस तक पहुंचेगी यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि होगा वहीं जो जिम्मेदार चाहे। 

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