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Sainik School Morena: फौलादी जिगर वाले जवान तैयार करेगा मुरैना का नया सैनिक स्कूल, जानें क्या होंगी खूबियां?

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मुरैना : चंबल की पहचान अब बदल रही है, कभी बीहड़ों और दस्यु कथाओं के लिए चर्चित मुरैना अब वीर सैनिकों की नई नर्सरी बनने जा रहा है. शहर के टीएसएस इंटरनेशनल स्कूल में रविवार कों न्यू सैनिक स्कूल की शुरुआत के साथ युवाओं के सपनों को नई दिशा मिली है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जितेंद्र माहेश्वरी ने इसका शुभारंभ करते हुए कहा, ” अब यहां के छात्र सेना के शीर्ष पदों तक पहुंच सकेंगे.”

चंबल के युवाओं को मिलेंगे नए अवसर

80 सीटों वाले इस स्कूल में शिक्षा के साथ अनुशासन और सैन्य प्रशिक्षण का संगम होगा, जिससे चंबल अंचल के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलेंगे. कार्यक्रम में न्यायिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. वर्षों से चली आ रही सैनिक स्कूल की मांग अब पूरी हो चुकी है. यह संस्थान न सिर्फ शिक्षा देगा बल्कि राष्ट्रसेवा की भावना भी विकसित करेगा.

यहां मिलेगा आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण

इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने कहा, ” अब तक मुरैना के युवा सेना में सूबेदार और मेजर जैसे पदों तक ही सीमित रह जाते थे, लेकिन अब इस सैनिक स्कूल के माध्यम से यहां के छात्र सेना के शीर्ष पदों तक पहुंच सकेंगे. रक्षा मंत्रालय की सैनिक स्कूल सोसायटी के तहत पीपीपी मोड पर संचालित इस स्कूल में 80 सीटों के साथ पढ़ाई शुरू हुई है. यहां छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ सैन्य अनुशासन और प्रशिक्षण भी मिलेगा, जिससे वे देशसेवा के लिए पूरी तरह तैयार हो सकेंगे.”

मुरैना की वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी

कार्यक्रम का आयोजन टीएसएस इंटरनेशनल स्कूल के डॉ. चंद्रपाल सिंह सिकरवार ऑडिटोरियम में किया गया. कायर्क्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया. इस दौरान विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से माहौल को देशभक्ति से भर दिया. न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने शिलान्यास पट्टिका का लोकार्पण कर स्कूल का विधिवत शुभारंभ किया. इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हितेंद्र द्विवेदी, रमेश सिंह सिकरवार सहित कई गणमान्य नागरिक, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक और छात्र मौजूद रहे. वर्षों पुरानी मांग पूरी होने से क्षेत्र में उत्साह है और मुरैना अब अपनी नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है.

चंबल के लिए न्यायमूर्ति माहेश्वरी का संदेश

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने अपने संबोधन में कहा, ” वर्ष 1972 में डकैत समस्या समाप्त होने के बाद से ही मुरैना में सैनिक स्कूल स्थापित करने की मांग लगातार उठती रही, जो अब जाकर साकार हुई.” उन्होंने मध्य प्रदेश के सैनिक स्कूल रीवा का उदाहरण देते हुए बताया, ” वर्तमान आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी और नेवी प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी भी सैनिक स्कूल से ही निकले हैं, जो इस तरह के संस्थानों की अहम भूमिका को दर्शाता है.” न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध पंक्तियां ”मुझे तोड़ लेना वनमाली…” का उल्लेख करते हुए युवाओं में देशभक्ति, त्याग और बलिदान की भावना जागृत करने का संदेश दिया. उन्होंने कहा, ” मुरैना का ये सैनिक स्कूल चंबल के युवाओं को न केवल बेहतर शिक्षा देगा, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना भी विकसित करेगा, जिससे क्षेत्र की नई और सकारात्मक पहचान स्थापित होगी.

  • वहीं, टीएसएस के चेयरमेन सुरेन्द्र प्रताप सिंह सिकरवार ने कहा, ” सैनिक स्कूल सोसायटी द्वारा मुरैना के सैनिक स्कूल के लिए 80 सीटें आवंटित की गई हैं.नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा प्रतिवर्ष प्रवेश परीक्षा के माध्यम से चयनित 80 छात्र-छात्राओं को एडमिशन दिया जाएगा. पीपीपी मोड के तहत मुरैना के सैनिक स्कूल में प्रतिवर्ष होने वाले नए एडमिशन में टीएसएस स्कूल के स्टूडेंट के लिए 20 प्रतिशत सीटें रिजर्व रहेंगी, यानी 2027 शैक्षणिक सत्र से टीएसएस स्कूल के 16 छात्रों को सैनिक स्कूल में दाखिल मिल सकेगा.”

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