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बेमौसम बारिश का कहर: महुआ की फसल हुई बर्बाद! किसानों के चेहरे पर छाई मायूसी, आर्थिक संकट का सता रहा डर

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लातेहारः जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महुआ का उत्पादन इस वर्ष मौसम की खराबी के कारण प्रभावित हुआ है. महुआ का उत्पादन कम होने के कारण ग्रामीण से लेकर व्यवसायी तक चिंतित हैं. महुआ का सीजन आने पर लातेहार जिले में 50 करोड़ रुपए से भी अधिक के इसका व्यवसाय होता था. लेकिन इस बार स्थिति काफी खराब है.

मौसम अनुकूल नहीं रहने से क्वालिटी भी खराब

दरअसल, लातेहार जैसे पिछड़े जिलों के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए महुआ का सीजन आमदनी का बेहतर स्रोत माना जाता है. बिना पूंजी लगाए ग्रामीण महुआ से काफी अच्छी आमदनी कर लेते हैं. लेकिन इस बार महुआ के सीजन में मौसम की खराबी के कारण महुआ का उत्पादन प्रभावित हो गया. स्थिति ऐसी हो गई है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 30 से 35% ही महुआ के फल आए हैं. मौसम अनुकूल नहीं रहने के कारण महुआ के फल की क्वालिटी भी थोड़ी निम्न है.

महुआ का उत्पादन गर्मी पर निर्भर है- ग्रामीण

इधर, महुआ का उत्पादन प्रभावित होने से ग्रामीण काफी चिंतित हैं. ग्रामीण अवधेश सिंह, विजय उरांव, सरिता देवी ने बताया कि इस वर्ष मौसम खराब रहने के कारण महुआ का उत्पादन काफी कम हो रहा है. इससे ग्रामीणों को भी भारी नुकसान हुआ है. ग्रामीणों ने बताया कि महुआ का उत्पादन गर्मी पर निर्भर करता है. लेकिन इस बार लगातार बारिश हो जाने के कारण मौसम गर्म नहीं हो पा रहा है, जिससे महुआ के फल भी काफी कम आ रहे हैं.

मार्च से अप्रैल तक रहता है महुआ का सीजन

ग्रामीणों ने बताया कि महुआ का सीजन मुख्य रूप से मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक रहता है. अप्रैल में गर्मी बढ़ने के बाद पहले सप्ताह में ही भारी उत्पादन होता है. लेकिन इस बार मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर अप्रैल के पहले सप्ताह तक बारिश हो जाने के कारण मौसम गर्म नहीं हुआ. इसका असर महुआ उत्पादन पर पड़ा है और अब धीरे-धीरे महुआ का सीजन भी समाप्त होने वाला है. यदि मौसम ने साथ नहीं दिया तो महुआ का उत्पादन 30 से 35 % भी नहीं हो पाएगा.

ग्रामीण से लेकर व्यवसायी तक चिंतित

महुआ के उत्पादन से जहां ग्रामीणों को अच्छी आमदनी होती है, वहीं व्यवसायों को भी इससे लाभ होता है. स्थानीय व्यवसायी निर्दोष गुप्ता ने बताया कि वह लगभग 30 वर्षों से महुआ के व्यवसाय से जुड़े हैं. पहले ग्रामीण भारी मात्रा में महुआ बिक्री करने के लिए लाते थे, जिससे ग्रामीणों को साथ-साथ उन्हें भी अच्छी कमाई हो जाती थी.

लेकिन इस वर्ष उत्पादन नहीं होने के कारण महुआ की खरीद बिक्री न के बराबर है. इससे व्यवसायों को भी नुकसान होगा. उन्होंने बताया कि लातेहार जिले में कम से कम 50 करोड रुपए से भी अधिक का व्यवसाय सिर्फ महुआ का होता था. लेकिन इस बार स्थिति दयनीय लग रही है.

पेड़ों की संख्या में भी आ रही है कमी

लातेहार जिले में महुआ के पेड़ों की संख्या में भी लगातार कमी आ रही है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि ग्रामीण महुआ चुनने के लिए पेड़ के नीचे आग लगा देते हैं. जिससे महुआ के नए पौधे जलकर नष्ट हो जाते हैं. नए पौधे लग नहीं रहे हैं और पुराने पेड़ धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं. इससे महुआ का उत्पादन भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है.

शराब बनाने में होता है महुआ का उपयोग

महुआ का उपयोग मुख्य रूप से शराब बनाने में ही होता है. लातेहार से बड़े पैमाने पर महुआ का निर्यात बंगाल, ओडिशा तथा अन्य राज्यों में किया जाता है. लेकिन इस बार महुआ का उत्पादन कम होने के कारण इसका असर अन्य राज्यों में भी दिख सकता है.

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