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Man-Animal Conflict: पेंच रिजर्व में बाघों के हमले तेज, 90 दिनों में 4 की मौत; डरे ग्रामीण और प्रशासन अलर्ट

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सिवनी: पेंच टाइगर रिजर्व में पिछले 3 महीने में बाघ ने चार लोगों को अपना शिकार बनाया है. इंसानों पर हो रहे बाघों के हमले से इलाके में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों को खेतों में जाने और मवेशियों को चराने के लिए ले जाने पर भी डर लगने लगा है. आखिर क्यों इंसानों पर हावी हो रहे बाघ जानिए विशेषज्ञ से.

जंगल और खेतों में काम करना हो रहा मुश्किल

कुम्भपानी के किसान अनिल इवनाती ने बताया कि “लगातार इंसानों पर बाघ हमला कर रहे हैं. जिसके चलते पेंच टाइगर रिजर्व के किनारे वाले गांव के किसानों को खेतों में जाना भी दूभर हो गया है. बुधवार को महुआ बीनने गए युवक पर टाइगर ने अटैक कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. घटना पेंच नेशनल पार्क छिंदवाड़ा क्षेत्र के कुंभपानी वन परिक्षेत्र बीट रमपुरी के कक्ष क्रमांक 1399 की है. बफर जोन के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में थाना बिछुआ स्थित नाहरझिर के निवासी महेन्द्र मांडेकर सुबह अन्य ग्रामीणों के साथ महुआ बीनने गया था.

इस दौरान दोपहर तक सभी लौट आए, लेकिन महेन्द्र के नहीं आने पर परिवार वाले और महेन्द्र के पिता ढूंढने जंगल गए. जहां कुछ ही दूरी पर उन्हें बाघ दिखाई दिया. उसके पास ही महेन्द्र का शव मिला. शव के पास ही बाघ के बैठे दिखने पर परिवार वालों ने शोर मचाकर और पत्थर फेंककर उसे भगाया. घटना की सूचना फॉरेस्ट अधिकारियों को मिलने के बाद दोपहर दो बजे टाइगर रिजर्व का स्टाफ और थाना बिछुआ के पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे थे.

इसके पहले हुए बाघ के हमले में मौत

31 दिसंबर 2025 किसान की मौत पूर्व वनमंडल के चौरई रेंज के अंतर्गत आने वाले ग्राम किशनपुर के किसान की मौत हो गई थी. पूर्व वनमंडल के चौरई अंतर्गत पेंच पार्क के बफर जोन के पास वन्यप्राणी के हमले से बिछुआ ब्लॉक के ग्राम किशनपुर निवासी 59 साल के बलराम डेहरिया का उसके खेत के पास ही शव मिला था.

6 जनवरी 2026 को पेंच टाइगर रिजर्व के छिंदवाड़ा क्षेत्र स्थित गुमतरा कोर वन परिक्षेत्र में बीट छेडिया के महादेव घाट के पास एक व्यक्ति का क्षत-विक्षप्त शव मिला था.

17 जनवरी 2026 बिछुआ में रात खेत में सिंचाई करने जा रहे 36 साल के मजदूर राजकुमार कहार पर बाघ ने हमला कर दिया.

बाघों के इलाके में दखल इंसानों के लिए हो रहा खतरनाक

वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉ अंकित मेश्राम का कहना है कि “बाघ अपना एक इलाका निर्धारित होता है. उस इलाके में अगर कोई भी दखल करता है, तो बाघ उसे पसंद नहीं करता है, फिर चाहे वह इंसान हो या जानवर. बाघ मार्किंग कर अपना इलाका तय कर लेता है. अगर कोई भी जानवर उसके अंदर जाता है, तो बाघ को डर भी लगता है, इसलिए वह हमलावर होता है. यही हालत इंसानों के साथ भी होते हैं. बाघ जब रहवासी इलाके में आते हैं, तो इंसानों को देखकर उन्हें खुद की जान बचाने का खतरा होता है और सेल्फ डिफेंस में बाघ इंसानों पर हमला कर देते हैं.”

सतर्क रहने के लिए चेतावनी

पेंच टाइगर रिजर्व के एसडीओ अतुल पारधी ने बताया कि “बफर जोन में हमेशा जानवरों का मूवमेंट रहता है. नजदीक से ही कई गांव हैं. इन लोगों को सतर्क रहने के लिए हमेशा कहा जाता है. इसके साथ ही जंगलों में जाने के लिए मनाही रहती है, लेकिन कई लोग बाघ की टेरिटरी में पहुंच जाते हैं. जिससे खतरा बढ़ जाता है.

खासतौर पर मवेशियों के चरने और गर्मी के दिनों में महुआ बीनने और वन उपज इकट्ठा करने के दौरान ऐसी घटनाएं होती है. हालांकि सभी पीड़ितों के लिए मुआवजा का प्रावधान है. समय-समय पर ग्रामीणों को हिदायत देखकर वन प्राणियों से सुरक्षित रहने के लिए कार्यशाला भी की जाती है.

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