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सराफा चौपाटी राजनीतिक मुद्दा,महापौर का यूटर्न,व्यापारियों की परेशानी सही सुरक्षा,तंग गलियां,मूलभूत सुविधाओं का अभाव, तो क्यों शिफ्ट नहीं हो जाती कहीं और!।

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सराफा चौपाटी,सुरक्षा की दृष्टि,राजनीतिक बन गया मुद्दा,समिति रिपोर्ट में भी शिफ्ट करने की बात,महापौर अड़े,सराफा व्यापारी डटे।

यह धरोहर बनी अब परेशानी की वजह,तंग गलियां,पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव। 

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर 

सराफा चौपाटी को लेकर सराफा व्यापारी डटे हुए हैं। दूसरी तरफ महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने उक्त मामले से यूटर्न लेते हुए अब सराफा चौपाटी की वकालत शुरू कर दी हैं। उनके अनुसार सराफा चौपाटी पुरानी धरोहर हैं। जिसे नगर निगम छेड़ना नहीं चाहता हैं। वहीं दूसरी और सराफा व्यापारी अब इस सांस्कृतिक धरोहर से सुरक्षा खतरे सहित दर्जनों परेशानियों को गिनवा रहे हैं। लेकिन सराफा चौपाटी का मामला पूरी तरह उलझकर रह गया हैं। लेकिन सराफा चौपाटी को लेकर अब तमाम तरह की परेशानियों से जूझ रहे आम लोगों का कहना है कि सांस्कृतिक धरोहर को सहेजा जाता हैं। लेकिन यह धरोहर अगर परेशानी की वजह बन जाए तो उसमें सुधार जरूरी हैं। 

राजनीतिक मुद्दा बना दिया नगर निगम ने।

दरअसल बताया जा रहा हैं कि सराफा चौपाटी के मुद्दे ने राजनीतिक मोड़ ले लिया हैं। दरअसल सराफा चौपाटी अब चार नंबर की राजनीति में उलझकर रह गई हैं। एक तरफ महापौर पुष्यमित्र भार्गव सराफा चौपाटी हटाने से साफ इनकार कर रहे है तो दूसरी और स्थानीय चार नंबर विधायक मालिनी गौड ने अभी भी इस मामले में चुप्पी साध रखी हैं। 

दर्जनों समस्याएं व्यापारियों की मांग सही। 

सराफा चौपाटी स्मार्ट सिटी एरिया के अंतर्गत आता हैं। पिछले कई वर्षों से चौपाटी को हटाने और अन्य दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के कयास जारी हैं। जबकि अब सराफा चौपाटी में व्याप्त अव्यवस्थाओं और असुरक्षा भरे माहौल से व्यापारी तंग आ चुके हैं। क्योंकि तंग गली और लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए सराफा जैसा क्षेत्र छोटा पढ़ने लग गया हैं। यहां न ही पार्किंग की माकूल व्यवस्थाएं न ही सुरक्षा संबंधित कोई विशेष इंतजाम। 

निगम खुद अपनी समिति रिपोर्ट को कर नजरअंदाज। 

नगर निगम खुद अपने द्वारा बनाई गई समिति की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर रहा हैं। क्योंकि उक्त समिति सदस्यों ने भी सराफा चौपाटी को अन्यत्र स्थान पर शिफ्ट करने की अनुशंसा की थी।

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