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निगम अमला,जिला प्रशासन,यातायात पुलिस सभी गायब,राजवाड़ा रो रहा अपनी बदतर हालत पर

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राजवाड़ा के बद से बदतर हालात,जिम्मेदार समय समय करते रस्म निभाई, फिर हालात धड़ाम।
अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार

इंदौर।
राजवाड़ा को फिलहाल सिर्फ राजनीतिक अखाड़ा ही नहीं बनाया गया हैं। बल्कि अब राजवाड़ा अपनी बदतर हालत के लिए जिम्मेदारों को कोस रहा हैं। जब राजवाड़ा पर केबिनेट बैठक होती है या हाल ही में संपन्न योगा। तब यह राजवाड़ा की गंदगी छिपा दी जाती हैं। लेकिन दूसरे दिन वहीं हालात हो जाते हैं। क्योंकि जिम्मेदार विभाग नगर निगम,यातायात पुलिस,जिला प्रशासन समय समय पर रस्म निभाई करता रहता हैं। लेकिन अब इसकी बजाय राजवाड़ा पर ठोस कार्रवाई की दरकार हैं। यहां के यातायात की जो रोजाना बारह बज जाती हैं। उसके लिए ई रिक्शा,रिक्शा,बसों के वैध अवैध ठिए बंद करने की जरूरत हैं।

अवैध वसूली का गढ़ बना
इधर राजवाड़ा अब अवैध वसूली का गढ़ बन गया हैं। छूटभैये व्यापारियों से लेकर रिक्शा माफिया, ई रिक्शा माफिया यहां बेखौफ सवारी की जुगत लगाने वालों से प्रतिदिन के हिसाब से वसूली करते हैं। राजवाड़ा के नाम पर रोजाना लाखों रुपए वाले जाते हैं। यहीं नहीं सड़क,ओटले से लेकर छोटे छोटे कोने के रेट तय हैं। वह भी प्रतिदिन के हिसाब से। लेकिन जिम्मेदार सिर्फ सो रहे है या फिर राजवाड़ा मलाई खाने में व्यस्त हैं।

निगम करता सिर्फ मुनादी, काम हुआ और गायब

नगर निगम का रिमूवल उस दौरान जरूर मुनादी करता नजर आता हैं। लेकिन जैसे ही यहां से जेब गर्म हुई। वैसे ही अमला यकायक गायब हो जाता हैं। यह खुद स्थानीय व्यापारियों की पीड़ा है जिन्होंने निगम अमले की अब पोल खोलकर रख दी हैं।

व्यापारी और जनता आ जाएगी सड़को पर
चर्चा में किशनपुरा राजवाड़ा व्यापारी संघ के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि राजवाड़ा के जो हालात हैं जो जिम्मेदारों की निष्क्रियता के चलते बना दिए गए है। उसे देखते हुए अब स्थानीय व्यापारी और आमजनता भी सड़कों को उतरने का मूड बना चुके हैं जल्द ही राजवाड़ा के एक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। 

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