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नगर निगम में बंदरों की बांट, पाटिल नपा,अन्य की कब तक तैयारी?

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बंदरबांट में शामिल चेतन पाटिल निगम से बाहर,मगर दूसरों की कब आएगी बारी,

नगर निगम खुद क्यों नहीं बना रहा जांच समिति?

इंदौर। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने चेतन पाटिल की भ्रष्टाचार अधिनियम में सेवा समाप्त करते हुए नगर निगम से बाहर का रास्ता दिखा दिया हैं। लेकिन अभी भी उसके राजदार सुरक्षित हैं। नगर निगम आयुक्त द्वारा उक्त पूरे मामले की जांच नहीं बैठाना और सिर्फ चेतन पाटिल को नापना कई सवालों को जन्म देता हैं। क्योंकि इतनी बड़ी पौधों की खरीदी में सिर्फ चेतन पाटिल को आरोपी बनाना और अन्य को साहूकार समझना यह समझ से परे हैं। इधर निगमायुक्त की कार्यवाही को लेकर भी कहा जा रहा है कि ऐसा पहली बार हुआ कि EOW द्वारा छापामार कार्यवाही के बाद ही चेतन पाटिल को बाहर कर देना। ऐसा निगम के इतिहास में पहली बार हुआ है।

लोकायुक्त को अनुमति नहीं लेकिन पाटिल बाहर

नगर निगम में पदस्थ दर्जनों अधिकारी ऐसे है जो प्रतिनियुक्ति पर यहां जमे हुए है। उन्होंने भ्रष्टाचार भी चरम पर कर रखा है। लेकिन पिछले आठ सालों से लोकायुक्त ऐसे भ्रष्ट के मामले अटके हुए है क्योंकि नगर निगम लोकायुक्त को रोक रहा है। अब वह किसलिए यह किसी से छुपा नहीं हैं। क्योंकि यह कहना गलत नहीं होगा कि लोकायुक्त जैसी जांच एजेंसी की आंच इंदौर नगर निगम पर आई तो उसकी आंच में कितने ही नेता,अधिकारी तप जायेंगे।

चेतन पाटिल के रिश्तेदार अभी भी जद से बाहर क्यों ??
इस पूरे मामले में चेतन पाटिल के जो रिश्तेदार हैं जो अलग अलग जोनल कार्यालयों में पदस्थ हैं। उन पर निगम की जद क्यों दूर हो रही हैं यह सवाल भी बार बार उठाया जा रहा है। 

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