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INDORE, पूर्व MIC सदस्य जीतू यादव का वनवास हुआ समाप्त,लेकिन इधर भाजपा में वापसी उधर समिति की कमान निरंजन सिंह चौहान के हाथ,मेयर ने कर दिया सभी चकित।

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वापस आ गए,लेकिन नुकसान बहुत हो गया,जीतू यादव का भाजपा से वनवास समाप्त,मगर इधर आए और उधर समिति तो चली गई,राजस्व समिति प्रभारी निरंजन सिंह चौहान के पास,एक दम से समिति सौंपकर मेयर ने कर दिया चकित।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

भोपाल से पत्र चला और भाजपा से खुद भाजपा पार्षद कमलेश कालरा मामले में निष्काषित किए जीतू यादव की पार्टी में वापसी हो गई हैं। खुद नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि पूर्व MIC सदस्य जीतू यादव कि तमाम अटकलों के बीच भाजपा में वापसी हो गई हैं। लेकिन जीतू यादव ने इस निष्काषन पीरियड में खो तो बहुत चुके हैं। दरअसल जीतू की वापसी के साथ उनके महापौर परिषद सदस्य में वापसी के दरवाजें भी बंद हो गए हैं। क्योंकि इधर वापसी और उधर उनकी पूर्व समिति को निगम राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन चौहान को MIC बैठक में दे दी गई। जिसे लेकर अब मेयर पुष्यमित्र भार्गव के उक्त रुख को लेकर सभी चकित हैं। जबकि अब इसे लेकर चार नंबर से जोड़कर देखा जा रहा हैं।

समर्थकों की गलती, मिली सज़ा, या फ़िर ज्यादा ज़ोर से भागने पर खींची गई कमान।

पूर्व MIC सदस्य जीतू यादव और भाजपा पार्षद कमलेश कालरा विवाद के दौरान जीतू यादव समर्थकों ने जो घिनौनी हरकत की थी। उसके बाद आमजनता का कमलेश कालरा का साथ मिला था। और इसी दबाव में जीतू यादव को इस पूरे घटनाक्रम की कीमत चुकानी पड़ी थी। एक तरफ भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था। तो मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने अपनी MIC से भी उन्हें जिम्मेदारी मुक्त कर दिया था। लेकिन जिस तरह से जीतू यादव उभरकर आए यह विश्वास नहीं करने जैसी स्थिति है, क्योंकि उनकी धर्मपत्नी की सोशल मीडिया में संबल बांधना,जब लगभग सभी भाजपा नेता उक्त विवाद की आग से बच रहे थे। उसके बावजूद इस परिस्थिति के बाद जीतू यादव ने भाजपा में वापसी की। वह चर्चाओं का विषय हैं। क्योंकि उक्त पूरे घटनाक्रम को भाजपा के अंदरूनी क्लेश से जोड़कर देखा जा रहा था। और कयासों के बाद जीतू यादव का निष्कासन भाजपा द्वारा खत्म कर देना। इस पूरे मामले की शहरभर में चर्चा हैं। वह इसलिए क्योंकि जिस वक्त जीतू यादव कमलेश कालरा का विवाद हुआ था,उस वक्त जीतू यादव के सितारें बुलंदी पर थे।

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