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IDA को PMAY से झटका,MR 11विस्थापन पड़ी खटाई में,प्रति फ्लैट 10 लाख रुपए घाटे की योजना,गुलमोहर-अमलतास रहवासियों में खुशी लहर।

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IDA को PMAY से झटका, MR 11 विस्थापन पड़ा खटाई में,रहवासियों को कोर्ट से उम्मीद फैसला आयेगा उनके पक्ष में!

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने मेजर रोड 11 निर्माण में बाधक बन रहे
पट्टाधारियों,कब्जेधारियों और जमीन मालिकों को इंदौर विकास प्राधिकरण के ही स्कीम 136 स्थित गुलमोहर कॉम्प्लेक्स और अमलतास के खाली पड़े फ्लैटों में शिफ्ट करने की योजना बनाई थी। जिसे प्रधानमंत्री आवास विभाग ने नकार दिया हैं। दरअसल उक्त इंदौर विकास प्राधिकरण के फ्लैटों की कीमत 16 लाख रुपए तक है। और IDA के जिम्मेदार इन फ्लैटों को विस्थापित किये जा रहे 227 लोगो को ओने पौने दाम में दे रहे थे। लिहाजा अब PMAY ने IDA की उक्त योजना को नकारते हुए लगाम लगा दी हैं। जिसकी वजह से अब विस्थापन तो खटाई में पड़ गया हैं। वहीं दूसरी तरफ गुलमोहर कॉम्प्लेक्स और अमलतास में रहने वाले रहवासियों को माननीय न्यायालय से उम्मीद जागी है कि अब 29 जून को जो सुनवाई है उस सुनवाई में ida अपनी ही योजना से पीछे हट सकता है और फैसला विस्थापन का विरोध कर रहे रहवासियों के पक्ष में जाएगा।

IDA के खिलाफ खोला था मोर्चा।

इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने जो आनन फानन में विस्थापन की योजना बनाई थी। उसके खिलाफ सभी गुलमोहर कॉम्प्लेक्स और अमलतास के रहवासी एकजुट हो गए थे। उन्होंने ida के जिम्मेदारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। रहवासियों ने स्थानीय दो नंबर बीजेपी विधायक रमेश मेंदोला का भी घेराव कर दिया था। साथ ही साथ रहवासियों ने माननीय न्यायालय की भी शरण ली थी। जिसमें उन्होंने इंदौर विकास प्राधिकरण से अपने पैसे लौटाने की मांग उठाई थी। लेकिन अब केन्द्र से उक्त प्रस्ताव को नकार दिए जाने के बाद रहवासियों ने राहत की सांस ली हैं।

रहवासियों का तर्क कुछ ये था।

रहवासियों ने माननीय न्यायालय के समक्ष तर्क रखा था कि अगर कोई व्यक्ति ट्रेन में ट्रेन टिकट केटेगरी के मुताबिक ही सफर करता है। उसे जनरल टिकट में केंद्र सरकार भी फर्स्ट एसी या सेकंड एसी का सफर नहीं करवा सकती हैं। अगर ऐसा होता भी है तो यात्री को तय अतिरिक्त किराया तो रेलवे को भुगतान करना ही पड़ता हैं। लिहाजा कुछ घंटों के सफर में रेलवे अपना तय किराया नहीं छोड़ता है तो फिर जीवनभर की पूंजी जमा कर लिए गए फ्लैटों को लेकर रहवासी कैसे संतुष्ट हो सकते हैं।

227 विस्थापित की सूची प्रति फ्लैट 10 लाख का नुकसान।

इंदौर विकास प्राधिकरण ने जो विस्थापन योजना तैयार की थी। उसमें सरकार को प्रति फ्लैट 10 लाख रुपए का घाटा था। जो सीधे सरकार को ही भुगतना पड़ता। लेकिन PMAY द्वारा IDA की उक्त विस्थापन योजना को नकारने के बाद यह घाटे का सौदा भी टल गया हैं।

रहवासी संघ अध्यक्षों का कहना सोसायटी का माहौल बिगड़ने से बच गया।

चर्चा में गुलमोहर कॉम्प्लेक्स ब्लॉक ए रहवासी संघ अध्यक्ष ममता पांचाल ने कहा कि यहां के परिवारों की एकजुटता की वजह से इंदौर विकास प्राधिकरण की अनुचित विस्थापन योजना पर लगाम लगी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को धन्यवाद भी दिया।

हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

गुलमोहर कॉम्प्लेक्स ब्लॉक बी अध्यक्ष विनोद यादव ने कहा कि हम माननीय न्यायालय के आदेश आने तक उनकी ये ida के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। लेकिन केंद्र सरकार के उक्त फैसले के बाद रहवासियों ने राहत की सांस ली हैं।

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