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Sonipat Civil Hospital: सोनीपत सिविल अस्पताल में अव्यवस्था; भीषण गर्मी में बंद मिले OPD के पंखे, तड़पते रहे मरीज

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सोनीपत: हरियाणा में रिकॉर्ड तोड़ तापमान और जानलेवा लू (हीटवेव) के बीच सोनीपत के सरकारी सिविल अस्पताल से बेहद चिंताजनक और शर्मनाक तस्वीरें सामने आई हैं। आसमान से बरसती आग और असहनीय उमस के बीच अस्पताल की बाह्य रोगी विभाग (OPD) के मुख्य कमरों और वेटिंग एरिया में लगे पंखे पूरी तरह से बंद पाए गए। इसके चलते अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदारों को इस चिलचिलाती गर्मी में घंटों बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। अस्पताल परिसर के भीतर वेंटिलेशन न होने और पंखे बंद रहने से पूरा ओपीडी ब्लॉक किसी गर्म भट्टी की तरह तपता नजर आया, जिससे मरीज और उनके परिजन पसीने से तर-बतर और बेहाल दिखे।

🥵 बुजुर्गों, महिलाओं और मासूम बच्चों का उमस में घुट रहा दम: DC की सख्त गाइडलाइंस की अस्पताल में उड़ी धज्जियां

अस्पताल में मौजूद कई पीड़ितों और तीमारदारों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि ओपीडी के भीतर उमस का स्तर इतना अधिक है कि सामान्य रूप से सांस लेना तक दूभर हो रहा है। इस प्रशासनिक लापरवाही का सबसे ज्यादा खामियाजा इलाज के लिए दूर-दराज से आए लाचार बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मासूम छोटे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। चौंकाने वाली और विडंबनापूर्ण बात यह है कि सोनीपत के जिला उपायुक्त (DC) द्वारा ठीक एक दिन पहले ही भीषण हीटवेव को लेकर एक आपातकालीन गाइडलाइन जारी की गई थी। इस गाइडलाइन में स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश दिए गए थे कि सभी सरकारी अस्पतालों में पंखे, कूलर, एसी और ठंडे पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, लेकिन जमीनी हकीकत जिला कलेक्टर के इन कागजी आदेशों से बिल्कुल उलट और खौफनाक दिखाई दी।

📹 मीडिया के कैमरे देख दुम दबाकर भागे अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी: जवाब देने के बजाय एक-दूसरे पर टाली जिम्मेदारी

जब इस भारी अव्यवस्था को लेकर मीडिया की टीम ग्राउंड जीरो पर रियलिटी चेक करने पहुंची, तो अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस गंभीर लापरवाही पर आधिकारिक जवाब देने के बजाय अस्पताल के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और डॉक्टर्स बचते नजर आए। मीडिया के कैमरों और तीखे सवालों को सामने देख वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी दूरी बनाते हुए अपने कमरों से नदारद दिखे। जो इक्का-दुक्का कर्मचारी मौके पर मौजूद भी थे, वे कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इनकार करते रहे और इस बदहाली की पूरी जिम्मेदारी एक विभाग से दूसरे विभाग पर टालकर अपना पल्ला झाड़ते हुए दिखाई दिए।

❓ संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पर खड़े सिस्टम से बड़ा सवाल: क्या फाइलों में दबकर रह जाएगी मरीजों की यह तड़प?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब स्वास्थ्य व्यवस्था और जिला प्रशासन पर सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि जब जिला मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जैसी संवेदनशील और जीवन रक्षक जगह पर ही बीमार मरीज गर्मी और उमस में तड़पने को मजबूर हैं, तो आम जनता आखिर भरोसे के लिए किसके पास जाए? सरकारी दावों और हकीकत के बीच का यह बड़ा अंतर सीधे तौर पर गरीब जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल की ये बदहाल तस्वीरें मुख्यधारा की मीडिया में आने के बाद उच्चाधिकारी और प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा नींद से जागकर कोई ठोस एक्शन लेता है, या फिर यह मुद्दा भी हमेशा की तरह जांच की फाइलों में दबकर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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