INDORE MIC सदस्य पार्ट दो, तीन प्रमुख समितियां,कार्यप्रणाली पर सवाल,अवैध निर्माण से लेकर ‘लापता’ स्वास्थ्य दावों तक घिरी महापौर परिषद
MIC सदस्य: पार्ट दो
इंदौर नगर निगम के तीन प्रमुख समिति प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, अवैध निर्माण से लेकर ‘लापता’ स्वास्थ्य दावों तक घिरी महापौर परिषद,

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।
इंदौर नगर निगम की महापौर परिषद (MIC) के सदस्यों के कामकाज और उनकी सक्रियता को लेकर अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच गंभीर सवाल उठने लगे हैं। न्यूज WITH तड़का डॉट कॉम ने इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव की टीम के तीन MIC सदस्य जिनमें जनकार्य, जलकार्य और राजस्व समिति प्रभारी के कामकाजो और जिम्मेदारियों को लेकर समीक्षा खबर प्रसारित की थी। इसी कड़ी में अब ‘MIC सदस्य: पार्ट दो’ के तहत अब परिषद के तीन प्रमुख प्रभारियों—राजेश उदावत, अश्विनी शुक्ला और मनीष शर्मा उर्फ मामा की जमीनी हकीकत और उनके विभागों की स्थिति का विश्लेषण कर रहे हैं।
योजना समिति।

अवैध निर्माण का गढ़ और प्रभारी राजेश उदावत पर सवाल, नगर निगम की सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर विवादों में रहने वाली योजना एवं सूचना प्रौद्योगिकी समिति की कमान राजेश उदावत के हाथों में है। जमीनी हकीकत यह है कि आरोप है कि इस विभाग की नाक के नीचे पूरे शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण का खेल जारी रहा हैं। वार्ड की बदहाली खुद प्रभारी राजेश उदावत के अपने वार्ड में विकास और व्यवस्थाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इसके अलावा बड़ा उदाहरण ज़ोन 11 के वार्ड 60 का 80/3 दौलतगंज सहित दर्जनों उदाहरण हैं। जहां का अवैध निर्माण इस समय शहर में विभाग की लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आया है।
स्वास्थ्य समिति प्रभारी

अश्विनी शुक्ला ‘पार्ट-टाइम’ सक्रियता से जनता परेशान
शहर को स्वच्छता और स्वास्थ्य के मोर्चे पर चुस्त-दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य समिति प्रभारी अश्विनी शुक्ला के पास है। लेकिन सबसे ज्यादा उनके अलावा मेयर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी उनकी समिति की जिम्मेदारियों को देखते रहते हैं। लिहाजा इसके चलते उनका रवैया बेहद उदासीन नजर आता है।क्योंकि उनकी सीमित उपस्थिति विभाग के कामकाज को लेकर आम जनता का कहना है कि शुक्ला केवल समय-समय पर ही नजर आते हैं, हर वक्त फील्ड या दफ्तर में उपलब्ध नहीं रहते। इसके अलावा प्रशासनिक तालमेल का अभाव की स्थिति यह है कि वे किस दुनिया में व्यस्त रहते हैं, इसकी जानकारी खुद निगम के कई लोगों को नहीं पता है। वे केवल विशेष मौकों पर या महापौर व आलाकमान की विशेष अनुमति/इजाजत मिलने पर ही ‘प्रकट’ होते हैं।
गरीबी उपशमन समिति:

मनीष शर्मा ‘मामा’ के प्रभार में जमीनी काम गायब हैं।
महापौर परिषद के तीसरे प्रमुख सदस्य मनीष शर्मा उर्फ मामा हैं, जिन्हें शहर से गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए गरीबी उपशमन समिति का प्रभारी बनाया गया है। फाइलों में योजनाएं: ‘मामा’ कागजों पर तो इस महत्वपूर्ण विभाग के प्रभारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई ठोस असर दिखाई नहीं देता। जनता की सुध नहीं हैं। लेकिन इनकी समय समय पर सक्रियता उन्हें अन्य समितियों के प्रभारी से थोड़ा सक्रिय जरूर बनाती हैं। लेकिन फिर भी शहर के गरीब तबके तक सरकारी योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। जिससे प्रभारी की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गया है। मगर हां मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर उनकी सच्ची भक्ति हर समय चर्चा का विषय बनी रहती हैं।



इंदौर नगर निगम की साख को बनाए रखने में इन तीनों प्रभारियों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। लेकिन योजना विभाग में कथित भ्रष्टाचार व अवैध निर्माण, स्वास्थ्य विभाग के मुखिया की फील्ड से दूरी और गरीबी उपशमन में निष्क्रियता ने इस समय महापौर परिषद (MIC) को बैकफुट पर ला दिया है। अब देखना यह है कि इन गंभीर आरोपों और उठते सवालों के बाद नगर निगम प्रशासन क्या सुधारात्मक कदम उठाता है।