Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
श्री श्रीगौड ब्राह्मण समाज पदाधिकारियों का पहली बार हुआ ऐतिहासिक शपथविधि समारोह,जिसमें शामिल हुए सैक... IDA को PMAY से झटका,MR 11विस्थापन पड़ी खटाई में,प्रति फ्लैट 10 लाख रुपए घाटे की योजना,गुलमोहर-अमलतास... INDORE शहर में JIO AIRTEL सहित अन्य कम्पनियों के नेटवर्क धड़ाम,आपस में चल रहा कम्पीटीशन किसका ग्राहक... INDORE विश्व पर्यावरण दिवस, हवा में उड़ गया देश का पहला ऑक्सीजन पार्क,धरी रह गई सभी तैयारियां,कनाडिया... INDORE जल संरक्षण,नगर निगम महापौर सहित जिम्मेदार वर्षाजल को बचाने की कर रहे प्लानिंग,इवेंट,वहीं दूसर... दूषित पेयजल!,भाजपा कांग्रेस की जारी जुबानी जंग,जनता कंफ्यूज,जल संरक्षण को लेकर वार्ड की रैंकिंग!लेकि... INDORE कांग्रेस में कलेश, हाइड्रेंट पर चिंटू चौकसे का कब्ज़ा! बदनाम हो रही भाजपा,कांग्रेसी पार्षद के... Pune Liquor Tragedy: जहरीली शराब कांड में मौतों का आंकड़ा 18 पहुंचा; CID जांच शुरू, 8 पुलिसकर्मी निल... Weather Forecast: दिल्ली-NCR और UP-बिहार में बारिश-आंधी का अलर्ट; IMD ने जारी की भारी बारिश की चेताव... INDORE पानी के लेकर बवाल,शहरवासी चिंतित किसका करें यकीन किसका नहीं! पटवारी के आरोपों के बाद मेयर का ...

US-Iran Relations: ईरान के आगे झुका अमेरिका? तेहरान की शर्तों पर युद्धविराम की चर्चा के बीच ट्रंप के अगले कदम पर टिकीं निगाहें

62

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ना सिर्फ नरम पड़ गए हैं, बल्कि अमेरिका सरेंडर मोड में नजर आने लगा है. क्योंकि जहां ईरान एक तरफ लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है तो वहीं अमेरिका संधि प्रस्ताव लेकर ईरान का दरवाजा खटखटाने में लगा है. सवाल यही है कि क्या ट्रंप ने ईरान के जिद के आगे सरेंडर कर दिया या फिर ये कोई साजिश तो नहीं, क्योंकि अगर अतीत में झांके तो ट्रंप का चरित्र यू टर्न वाला रहा है.

फारस की खाड़ी में 40 दिनों तक चले युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान तो हो गया है लेकिन इस जंग ने ईरान को एक ऐसी नई शक्ति के रूप में उभारा है, जिसने सुपरपावर अमेरिका की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. भले ही ईरानी नेतृत्व पर अमेरिका ने चोट की हो, लेकिन न तो सत्ता परिवर्तन हुआ, न परमाणु मिशन रुका और न ही बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम खत्म हुआ. उल्टा, इस जंग ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का अवसर दे दिया है.

ट्रंप ने फिर लिया यू-टर्न

ईरान ने युद्धविराम तोड़ते हुए होर्मुज स्ट्रेट से लेकर UAE तक बमबारी की है. जहां दुनिया युद्ध के अगले चरण का अनुमान लगा रही थी, वहीं ‘मिस्टर यू-टर्न’ के नाम से मशहूर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी नीति बदल ली. अमेरिका ने ऐलान किया कि उसका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पूरा हो चुका है और वह जंग को आगे नहीं बढ़ाना चाहता है. विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ कहा कि अमेरिका समझौता करना चाहता है, शांति का मार्ग अपनाना पसंद करेगा और होर्मुज को खोलने पर चर्चा करना चाहता है ताकि जीवन सामान्य हो सके.

अमेरिका सरेंडर मोड में?

रूबियो के इस बयान के बाद दो बड़े सवाल उठने लगे हैं. क्या अमेरिका ने ईरान के सामने सरेंडर कर दिया है? क्या ईरान की युद्धनीति ने ट्रंप को परास्त कर दिया है? अमेरिका ने होर्मुज में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर रोक लगा दी है. ट्रंप का दावा है कि ईरान से समझौते पर बातचीत सही दिशा में है, हालांकि नाकाबंदी जारी रहेगी. यही वह परियोजना थी जिसके तहत अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन महज 48 घंटे में ही उसे ठंडे बस्ते में डालना पड़ा.

रक्षा जानकारों का मानना है कि अमेरिका के शांति के दावे को ईरान अपनी जीत मान रहा है. ईरान ने अपने भूगोल को परमाणु की तरह इस्तेमाल कर अमेरिका को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया है.

ट्रंप का डैमेज कंट्रोल और अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा

दुनिया में अमेरिकी सैन्य ताकत की पोल खुलने के बाद ट्रंप डैमेज कंट्रोल करने में जुट गए हैं. उनका कहना है कि असल में अमेरिका नहीं, बल्कि ईरान समझौते से बेकरार है. हालांकि, अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘एक्सिओस’ की रिपोर्ट ने ट्रंप के इस दावे पर पर्दा उठाया है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच एक पन्ने के प्रस्ताव पर चर्चा जारी है और अगले 48 घंटों में डील हो सकती है. दोनों पक्षों के बीच 14 सूत्रीय फॉर्मूला तैयार है, जिस पर सहमति बनती नजर आ रही है. यहां तक कि MoU साइन होने की भी संभावना जताई जा रही है.

क्या हैं प्रस्ताव की शर्तें

एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने जो संधि प्रस्ताव ईरान को भेजा है, उसमें प्रमुख शर्तें हैं-

  • प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 30 दिन का समय.
  • ईरान को 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा.
  • ईरान के जब्त किए गए फंड को रिलीज किया जाएगा.
  • होर्मुज से अमेरिका और ईरान दोनों मिलकर नाकाबंदी हटाएंगे.
  • वार्ता जिनेवा और इस्लामाबाद में हो सकती है.
  • दोनों देश सैन्य शिपिंग प्रतिबंध हटाएंगे.
  • ईरान UN के कड़े निरीक्षणों को स्वीकार करेगा और परमाणु हथियार न बनाने का वादा करेगा.
  • यानी यह वह फॉर्मूला है, जिससे अमेरिका इस जंग से बाहर निकलना चाहता है.

ट्रंप बन गए यू-टर्न मास्टर

पूरे ईरान युद्ध के दौरान में अपने सोशल मीडिया पर बयान देने और फिर उससे पलटने के लिए जाने जाने लगे हैं. ट्रंप ने होर्मुज में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू की, लेकिन ईरान ने अमेरिकी जहाजों पर हमले कर अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. 48 घंटे में ही इस परियोजना पर रोक लगा दी गई.

यहीं नहीं ट्रंप की यू-टर्न नीति का सबसे बड़ा सबूत 26 और 28 फरवरी की तस्वीरें हैं. 26 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी, और अगले हफ्ते वियना में मुलाकात की तारीख तय थी. लेकिन 48 घंटे के अंदर ही अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया. यानी शांति वार्ता की आड़ में अमेरिका ने विश्वासघात किया.

अमेरिकी सुपरपावर छवि पर धब्बा

ट्रंप ईरान के साथ हर मोर्चे पर विफल साबित हुए हैं. न तो वे अपनी बातों पर टिके रहे और न ही अपनी नीतियों पर. अब अमेरिका एक ऐसे ईरान से समझौता करने को मजबूर है, जिसने पूरे युद्ध में अपनी जिद और रणनीति दोनों बरकरार रखी. ईरान इसे अपनी बड़ी जीत मान रहा है, जबकि अमेरिका को अपनी ही धमकियों के बीच सरेंडर के मोड में आना पड़ रहा है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!