HEC Crisis: वेतन नहीं तो काम नहीं! HEC कर्मियों का बड़ा आंदोलन शुरू, HMBP प्लांट में उत्पादन पूरी तरह ठप
रांची: हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचइसी) में 29 माह से लंबित वेतन के विरोध में HEC कर्मियों ने आंदोलन की शुरुआत कर दी है. वेतन भुगतान नहीं होने से नाराज कर्मचारियों ने काम बंद कर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की. इस आंदोलन का सबसे अधिक असर एचएमबीपी (हेवी मशीन बिल्डिंग प्लांट) में देखने को मिला. जहां उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया. वहीं, एचएमटीपी (हेवी मशीन टूल्स प्लांट) और एफएफपी (फाउंड्री फोर्ज प्लांट) में भी आंशिक रूप से काम प्रभावित हुआ है.
बकाया वेतन नहीं मिलने पर जारी रहेगा आंदोलन
उत्पादन ठप होने से कंपनी के समग्र संचालन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. कर्मियों का कहना है कि इतने लंबे समय तक वेतन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है.
कर्मचारियों ने प्रबंधन से जल्द बकाया वेतन भुगतान की मांग करते हुए स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन अब तब तक जारी रह सकता है, जब तक उनका बकाया वेतन नहीं मिल जाता. प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण आने वाले दिनों में भी कार्य प्रभावित रहने की संभावना जताई जा रही है. इससे उत्पादन और कंपनी के वित्तीय संचालन पर और दबाव बढ़ सकता है.
इधर, एचइसी में कार्मिक निदेशक के पद पर बदलाव की भी घोषणा की गई है. भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, कृष्णेंदु कुमार घोष एचइसी के नए कार्मिक निदेशक होंगे. वर्तमान निदेशक मनोज लकड़ा का कार्यकाल 23 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद कृष्णेंदु कुमार घोष पदभार संभालेंगे. बताया जाता है कि कृष्णेन्दु घोष वर्तमान में भेल में एचजीएम के पद पर कार्यरत हैं.
29 महीने से बकाया है वेतन: महामंत्री
इस बीच एचईसी मजदूर संघ (बीएमएस) के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि 29 माह से वेतन नहीं मिलने के कारण मजदूरों को मानसिक और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. इसके बावजूद प्रबंधन दबाव बनाकर काम कराने की कोशिश कर रहा है, जिससे घबराहट में दुर्घटनाएं भी हो रही हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के पास लगभग 13.5 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद त्योहारों के समय भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया, जो प्रबंधन के तानाशाही रवैये को दर्शाता है. वहीं, मजदूरों की मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है. प्लांट में आपातकालीन व्यवस्था के लिए एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं है और दुर्घटना की स्थिति में घायल कर्मियों को निजी वाहनों या दोपहिया से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है.
रमाशंकर प्रसाद ने चेतावनी दी कि यदि मजदूरों की सुरक्षा, वेतन, कैंटीन सुविधा और सीपीएफ लोन जैसी बुनियादी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा. उन्होंने कहा कि मजदूर अब शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे और जरूरत पड़ी तो भेल प्रबंधन के खिलाफ भी व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.