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Wildlife News: जंगल में दिखा रहस्यमयी जीव! महुआ के फूल खाती ‘उड़ने वाली गिलहरी’ (Flying Squirrel) कैमरे में कैद

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धमतरी: क्या आपने कभी उड़ने वाली गिलहरी या देखी है, अगर नहीं तो फिर ये तस्वीर आपके लिए खास साबित हो सकती है. उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग के कैमरे में एक दुर्लभ उड़ने वाली काली गिलहरी कैद हुई है. गिलहरी आराम से महुआ के पेड़ पर बैठकर महुआ के फूल खा रही है. वन विभाग की टीम ने इस उड़ने वाली गिलहरी की तस्वीर और वीडियो जारी की है.

उड़ने वाली गिलहरी मिली

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने कहा कि हमारे लिए ये तस्वीर काफी अहम है. ये तस्वीर बताती है कि धमतरी के जंगल विविध जीव जंतुओं और परिंदों के लिए सुरक्षित पनाहगार साबित हो रहे हैं. वरुण जैन ने कहा कि यहां की जैव विविधता खास है जिसकी वजह से ये दुर्लभ तस्वीर सामने आई है.

जंगल की रहस्यमयी जीव

वन विभाग के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि उड़न गिलहरी अत्यंत दुर्लभ प्रजाति की जीव है. यह मुख्य रूप से उन जंगलों में पाई जाती है जहां पेड़ों की छतरियां आपस में जुड़ी रहती हैं. यह जीव जमीन पर कम और पेड़ों के बीच ग्लाइड करते हुए अधिक समय बिताती हैं. आमतौर पर उड़न गिलहरी भारत के पश्चिमी घाट, जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में ज्यादा देखी जाती हैं, लेकिन सेंट्रल इंडिया विशेषकर उदंती सीतानदी क्षेत्र में इनकी अच्छी संख्या मिलना वन विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

थर्मल ड्रोन से हो रही रहवास क्षेत्र की मैपिंग

उड़न गिलहरी के संरक्षण के लिए वन विभाग आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है. थर्मल ड्रोन के माध्यम से इनके रहवास क्षेत्र की मैपिंग की जा रही है, ताकि इनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जा सके और गतिविधियों की वैज्ञानिक निगरानी हो सके.

‘उड़ने वाला चूहा’ समझकर होता था शिकार

वन विभाग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पहले उड़न गिलहरी को ‘उड़ने वाला चूहा’ समझ लिया जाता था, जिसके कारण कई बार इसका शिकार कर दिया जाता था. इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू किया. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे 8 से 10 मामलों में कार्रवाई भी की गई है. अब ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़कर उन्हें इसकी पारिस्थितिक महत्व की जानकारी दी जा रही है.

अतिक्रमण हटाने से बदला जंगल का इकोसिस्टम

उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि पिछले 3 सालों में लगभग 850 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया, जिससे जंगल का प्राकृतिक स्वरूप वापस लौटा है. नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद वन विभाग की टीम अब अंदरूनी क्षेत्रों में सक्रिय होकर शिकारियों और तस्करों पर लगातार कार्रवाई कर रही है. इन प्रयासों का सकारात्मक असर अब वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के रूप में दिखाई दे रहा है.

इको-टूरिज्म को बढ़ावा, ग्रामीणों को रोजगार की उम्मीद 

वरुण जैन ने कहा, उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व अब इको-टूरिज्म का नया केंद्र बनता जा रहा है. यहां पर्यटक उड़न गिलहरी के अलावा भारतीय विशाल गिलहरी और दुर्लभ पक्षियों जैसे मालाबार बर्ड को देखने पहुंच रहे हैं. वन विभाग का मानना है कि इससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का सतत विकास संभव होगा.

वन विभाग के लगातार संरक्षण प्रयास, तकनीक का उपयोग, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और ग्रामीणों की भागीदारी ने उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व को वन्यजीव संरक्षण की सफल मिसाल बना दिया है. उड़न गिलहरी की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि जंगल का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत हो रहा है.

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