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INDORE, हाईकोर्ट के आदेश बनाया मज़ाक,मेयर की जीरो टॉलरेंस फुस्सी बम,अवैध होर्डिंग,यूनीपोल, ना FIR,कार्यवाही,अधिकारी या तानाशाह,नियमों कायदों धड़ाम,जिम्मेदारों की चुप्पी,कहती बड़ी पटकथा।

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हाईकोर्ट के आदेश,महापौर का जीरो टॉलरेंस की निकली हवा, नहीं हट रहे अवैध यूनीपोल,होर्डिंग,,न कोई FIR न ही जनता की जान की फिकर,निगम अधिकारी बने तानाशाह,कार्यवाही के नाम पर मात्र औपचारिकता,नियम कायदे धड़ाम और मनमानी। शहर मानो हुआ अनाथ,जिम्मेदारों की ये चुप्पी कहती है फंस गए जिम्मेदार!

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

                              हादसों का डर

शहर के मुख्य चौराहों, फुटपाथों और सड़क के डिवाइडरों पर तय मानकों से बड़े और भारी यूनिपोल लगा दिए गए हैं। तेज हवा या बारिश के दौरान इनके गिरने से राहगीरों और वाहन चालकों की जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।

यातायात में बाधा,बन गए जानलेवा।

बेतरतीब ढंग से सड़कों तक घेरे गए ये विज्ञापन बोर्ड चालकों का ध्यान भटकाते हैं और अंधा मोड़ (blind spots) पैदा करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। [1]

₹11 करोड़, नहीं 200 करोड़ का है यूनिपोल घोटाला, राशि बढ़ती जा रही।

राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ ही नियमों को ताक पर रखकर बिना अनुमति विज्ञापन लगाने के कारण इंदौर नगर निगम के विज्ञापन विभाग को कथित तौर पर ₹11 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ बताया जा रहा हैं। जबकि इंदौर नगर निगम खजाने को 200 करोड़ से नुकसान हो रहा हैं या शुद्ध शब्दों में कहे तो 200 करोड़ का यह मार्केट विभाग का बड़ा घोटाला हैं। जिसका आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा हैं।

EOW की जांच,कछुआ चाल।

पूर्व में व्यापक भ्रष्टाचार और वित्तीय हेरफेर के आरोपों के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इसकी शिकायत तो दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी लेकिन ईओडब्ल्यू की जांच कछुए से भी धीमी रफ्तार पकड़े हुए हैं। फिलहाल इंदौर शहर में विज्ञापन अनुबंधों और ‘आउटडोर मीडिया पॉलिसी-2017’ का खुला उल्लंघन हो रहा है।

नगर निगम की ‘जीरो टॉलरेंस’ कार्रवाई,या मज़ाक।

 

महापौर का आदेश या सिर्फ पल्ला झाड़ लेना मात्र क्योंकि हाईकोर्ट की फटकार के बाद इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू करने की बात कही थी। उन्होंने सबसे पहले राजनेताओं को कड़ा संदेश देने के लिए खुद की तस्वीरों वाले राजनीतिक और धार्मिक होर्डिंग्स को तुरंत हटाने के निर्देश दिए तो थे लेकिन हाल ही में आयोजित कार्यक्रम में उन्हीं बैनरों, होर्डिंग और यूनीपोल पर वह खुद टंगे दिखे।

अभियान मात्र नौटंकी।

नगर निगम की टीमों ने शुरुआती दिनों में कार्यवाही करते हुए रस्म अदायगी की। और अब यह जिम्मेदारों का अभियान मात्र नौटंकी साबित हो रहा हैं। शहरभर के अवैध कटआउट, बैनर और खतरनाक अवैध यूनिपोल, जिम्मेदारों जिनमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव,निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को मुंह चिढ़ा रहे हैं। मेयर की जीरो टॉलरेंस को खुला चैलेंज दे रहे हैं। क्योंकि कावड़ यात्रा तो निकल गई। जिस तरह से स्वागत द्वार के नाम पर सडके,जिम्मेदारों के कार्यालय तक घेर लिए गए। और जिम्मेदार सहमे अपने कार्यालयों में चुपचाप बैठे रहे। लेकिन कार्यवाही के नाम पर जीरो टॉलरेंस फुस्सी बम निकला।

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