INDORE,MIC सदस्य पार्ट थ्री,चार सालों तक सोते रहे समिति प्रभारी,हो गया बंटाधार,सब मेयर के भरोसे,कोसे गए महापौर,लेकिन समिति प्रभारी सुविधाओं को भोगने में थे व्यस्त!
MIC सदस्य पार्ट three

इंदौर महापौर के कल्दार,जिन्होंने मेयर की डुबोई नैय्या,न किया काम,न आए ज्यादा नज़र,चार साल सबकुछ चला बस रामभरोसे।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

इंदौर नगर निगम महापौर परिषद सदस्यों की कड़ियों में न्यूज WITH तड़का डॉट कॉम ने सबसे पहले जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौड़,जलकार्य अभिषेक शर्मा, और राजस्व समिति प्रभारी निरंजनसिंह चौहान, योजना समिति प्रभारी राजेश उदावत,गरीबी उपशमन प्रभारी मनीष शर्मा,और स्वास्थ्य समिति प्रभारी अश्विनी शुक्ला के चार वर्षीय कार्यकाल का ब्यौरा हमारे पाठकों के सामने रखा था। दरअसल हमारा उद्देश्य मात्र यही है कि इंदौर नगर निगम खजाने से जिस जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से ये MIC सदस्य महंगी गाड़ियों,आलीशान ऑफिस के विराजते हैं। क्या उसके मुताबिक यह वैसा कार्य भी करते हैं या नहीं। इसके अलावा कोई भी समस्या,दिक्कतें, त्रासदी आती है तो यही महापौर परिषद सदस्य बिल में दुबक जाते है और सामने रहते हैं। मेयर पुष्यमित्र भार्गव।

जिन्हे विपक्ष से लेकर आमजनता तक की खरी खोटी सुननी पड़ती हैं। अब बात करे दूषित पेयजल,जर्जर सड़कों,चौक पड़ी ड्रेनेज लाइन की तो उसके जितनी जिम्मेदारी और आमजनता,विपक्ष के जीतने ताने अधिकारियों और मेयर को सुनना पड़ती हैं। क्या ये समिति प्रभारियों की जिम्मेदारियां नहीं है कि उन्हें भी ये सबकुछ सुनाई दे। क्योंकि फिर भागीरथपुरा कांड हो,फर्जी बिल घोटाला हो,फर्जी नामांतरण घोटाला,शहर में जारी अवैध निर्माण,लॉलीपॉप ,यूनिपोल से संबंधित मामले। ऐसे मामलों में सिर्फ मेयर ही क्यों घिराए, क्योंकि विभागवार तो मेयर ने भी जिम्मेदारी उनके कलदार कहे जाने वाले महापौर परिषद सदस्यों को खुद महापौर ने दे रखी हैं। बकायदा उसके लिए सुख सुविधाएं भी जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों से ये MIC सदस्य ले रहे हैं। लेकिन कामकाज और जिम्मेदारी के समय यह सभी गायब। इसी कड़ी में अब निगम लेखा समिति प्रभारी प्रिया दांगी,यातयात समिति प्रभारी राकेश जैन और सामान्य प्रशासन विभाग प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया की बात करते हैं।
लेखा समिति प्रभारी

इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव की टीम में लेखा समिति का प्रभार प्रिया दांगी को दिया गया हैं। लेकिन इनके कार्यकाल में फर्जी बिल घोटाला हो गया। जिसे लेकर हर बार की तरह लेखा समिति प्रभारी प्रिया दांगी चुप ही रही। पूरे घटनाक्रम के दौरान समिति प्रभारी की चुप्पी हर किसी को चुभी। क्योंकि जिस समिति से वह आती हैं। उसे लेकर उन्होंने कोई भी सक्रियता नहीं दिखाईं। चार साल कार्यकाल के दौरान परिषद सम्मेलन के अलावा प्रिया दांगी कुछ ज्यादा नज़र नहीं आई। इधर लेखा समिति जो कि अहम समिति मानी जाती हैं। उसे लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। वो तो भला हो महापौर का कि उन्होंने अपनी परिषद के लिए हर बात का आगे आकर जवाब दिया। नहीं तो विपक्ष घेरने में कभी पीछे नहीं रहा।
यातायात समिति।

शहर में यातायात की क्या व्यवस्थाएं। यह किसी से छुपी नहीं हैं। शहरभर में जिस तरह चार सालों तक वाहन गुत्थमगुत्था हुए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव को जमकर हमेशा कोसा गया। उसका सारा श्रेय यातायात समिति प्रभारी राकेश जैन को जाता हैं। क्योंकि चार सालों के कार्यकाल में उनके द्वारा कोई ऐसा खास नवाचार,नई योजना, बेहतर यातायात प्रबंधन को लेकर कोई खास नहीं किया गया। सब मेयर के भरोसे रहे,और पूरे चार सालों तक महापौर ही कोसे गए।
सामान्य प्रशासन विभाग

अब बात करते है सामान्य प्रशासन विभाग की तो इसकी कमान नंदकिशोर पहाड़िया के पास हैं। विभागीय अफसरों से तालमेल नहीं होने के चलते। उक्त विभाग में समिति प्रभारी से ज्यादा अफसरों की तूती चार सालों से बोल रही हैं। जबकि समिति प्रभारी पहले कभी महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ देखे जाते थे। लेकिन यकायक पांच नंबर विधायक महेंद्र हार्डिया से मतभेदों के बाद नंदकिशोर पहाड़िया ने मेयर से दूरियां बना ली।