INDORE,नगर निगम की दो कार्यवाही दोनों सवालों के घेरे में!एक पर 10 लाख जुर्माना,दूसरे रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप पर मेहरबानी क्यों? और जारी हो गया पूर्णता प्रमाण पत्र।
इंदौर नगर निगम के दो मामले, सवालों के घेरे में कार्रवाई
एक ओर 10 लाख की पेनाल्टी, दूसरी में ऐसे ही उल्लंघन लेकिन रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप को पूर्णता प्रमाण-पत्र पर उठते सवाल

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार।
इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला निहालपुर मुंडी स्थित रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप से जुड़ा है। जहां पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी हो गया लेकिन इसके बावजूद भी कि रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप की बकाया टैक्स राशि, कथित नियम उल्लंघन जीपीएस नक्शे में होने के बावजूद सरकारी जमीन पर बनी निजी सड़क के चलते पेड़ों का नामोनिशान मिट गया हैं। और तो और खनिज विभाग की पेनाल्टी को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इंदौर नगर निगम द्वारा अन्य जिसमें मात्र दो पेड़ काटने ग्रेन बेल्ट पर झोपड़ा बनाने,निर्माण सामग्री डंप करने, के मामले में भारी-भरकम पेनाल्टी लगाए जाने से कार्रवाई के अलग-अलग पैमानों को लेकर भी चर्चा है। क्योंकि निहालपुर मुंडी स्थित रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप को लेकर इंदौर नगर नगर जिम्मेदारों की रियायत अब सवालों के घेरे में आ रही है।

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक रॉयल ग्रीन काउंटी में स्वीकृत लेआउट, हरित क्षेत्र और निर्माण संबंधी प्रावधानों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मौके की जांच के दौरान कुछ निर्माण/सड़क संबंधी स्थितियां स्वीकृत दावों से अलग पाई गईं और इसके बावजूद टाउनशिप को पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने पर सवाल उठे।

पूर्णता प्रमाण-पत्र पर सबसे बड़ा सवाल
विवाद का प्रमुख बिंदु यही है कि यदि किसी टाउनशिप के पूर्णता प्रमाण-पत्र के लिए निर्धारित शर्तें पूरी होना आवश्यक हैं, तो उन शर्तों के पालन का सत्यापन किस स्तर पर हुआ? विशेष रूप से पौधरोपण और हरित क्षेत्र को लेकर जीपीएस आधारित निरीक्षण/दस्तावेजों में सामने आने वाली स्थिति और जमीनी स्थिति में अंतर होने के आरोपों ने सवाल बढ़ा दिए हैं। वह इसलिए क्योंकि सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करते हुए उस पर पौधे लगाने की बजाय निजी कॉलोनी की सड़क बना दी गई। नगर निगम से यह स्पष्ट किया जाना अपेक्षित है कि पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी करते समय किन दस्तावेजों और किस स्तर की स्थल-जांच को आधार बनाया गया था।

बकाया राशि को लेकर भी सवाल
मामले में निगम से जुड़े उक्त क्षेत्र के तत्कालीन,अभी तक चर्चित ARO सलमान खान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि पूर्व में टाउनशिप से संबंधित बकाया राशि के मामले में पूरी राशि जमा हुए बिना ही प्रकरण का निपटारा कर दिया गया था। इसकी विभागीय फाइल, भुगतान विवरण और आदेश की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसलिए सवाल यह है कि संबंधित प्रक्रिया में निगम के नियमों और वित्तीय प्रावधानों का पालन किस तरह किया गया?

खनिज विभाग की पेनाल्टी और करोड़ों की कथित बकाया राशि

रॉयल ग्रीन काउंटी के निर्माण से जुड़े कथित अवैध उत्खनन/खनिज उपयोग को लेकर भी मामला सामने आया था। न्यूज WITH तड़का डॉट कॉम द्वारा पूर्व में प्रकाशित खबर में मय दस्तावेज में ₹8 करोड़ से अधिक की खनिज पेनाल्टी का उल्लेख किया गया था। ऐसे में नगर निगम और संबंधित विभागों के सामने अहम सवाल यह है कि यदि इतनी बड़ी राशि का विवाद लंबित है, तो टाउनशिप से जुड़े अन्य अनुमोदनों और प्रमाण-पत्रों की स्थिति क्या है? क्या सभी देनदारियों और वैधानिक औपचारिकताओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई। फिर भी पूर्णता प्रमाण जारी कर दिया गया था।

जांच करने पहुंची निगमकर्मी पर भी उठे थे सवाल।
मामले की जांच से जुड़ी निगमकर्मी टीना सिसोदिया के निरीक्षण और रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उनके स्थल निरीक्षण और सड़क की स्थिति संबंधी टिप्पणी का उल्लेख है। ऐसे में पूरी जांच रिपोर्ट, मौके के फोटो/वीडियो, जीपीएस रिकॉर्ड और संबंधित फाइल को सार्वजनिक करने से कई सवालों का जवाब मिल सकता है।

अपर आयुक्त स्तर पर मामला, कार्रवाई का इंतजार

मामले को लेकर इंदौर नगर निगम अपर आयुक्त मनोज पाठक के स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। क्योंकि उक्त मामला अभी भी परीक्षण और जांच का विषय है।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक टाउनशिप का नहीं, बल्कि यह भी है कि नगर निगम के नियम सभी परियोजनाओं पर समान रूप से लागू होते हैं या नहीं।

अब निगम से जनता के सीधे सवाल

पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले किन शर्तों का सत्यापन किया गया? हरित क्षेत्र और पौधरोपण का जीपीएस/स्थल सत्यापन किस अधिकारी ने किया?कथित बकाया राशि के निपटारे की प्रक्रिया क्या थी? ₹8 करोड़ से अधिक की बताई जा रही खनिज पेनाल्टी की वर्तमान स्थिति क्या है? संबंधित
अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच हुई या नहीं? यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या रॉयल ग्रीन काउंटी से संबंधित पूरी फाइल और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है,क्या नगर निगम इस पूरे मामले की स्वतंत्र और दस्तावेज आधारित जांच कराकर स्थिति साफ करेगा, या सवाल और आरोप इसी तरह बने रहेंगे?
