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INDORE, वाह रे,,,नरक निगम मार्केट विभाग,यूनिपोल तो है ही अवैध! इसकी ठेका प्रक्रिया में भी उठ रहे सवाल,चहेती कंपनी को उपकृत करने में ताक में सारे नियम कायदे,ऐसा निगम अफसरों का एक ही एजेंसी से इतना क्या मीठा?

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इंदौर में यूनीपोल टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल,नियमों को ताक पर रख चहेती कंपनियों को उपकृत करने का आरोप


शहर में यूनीपोल का जाल,इधर निगम अधिकारियों की करामात,नियम विरुद्ध सुपीरियर सर्विसेज एडवायइजिग कंपनी और PRJ OOH पर बरसी अफसरों की रहमत,टेंडर प्रक्रिया को किया मनमाना,चेहते के लिए सबकुछ ताक पर,खुद मेयर भी उठा चुके सवाल 2021 के टेंडर को इतनी बार मोहलत, दाल में काला या पूरी दाल ही काली।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर ।

इंदौर नगर निगम मार्केट विभाग अफसरों से लेकर एक अदने से कर्मचारी की सुपीरियर सर्विसेज एडवायइजिग कंपनी पर जमकर बरसी हैं। दरअसल अफसरों ने नियम कायदों को ताक पर रखते हुए सुपीरियर सर्विसेज एडवायइजिग कंपनी जिसे अब PRJ OOH ने खरीद लिया हैं। इस कंपनी को लेकर इंदौर नगर निगम मार्केट विभाग अधिकारियों जिनमें अपर आयुक्त आकाश सिंह,अदने कर्मचारी राकेश चौहान सहित अन्य पर अमले ने कायदों को ताक पर रख दिया हैं। एक तरफ जहां यूनीपोल लॉलीपॉप की शहर में बाढ़ आ गई हैं। वहीं दूसरी तरफ उक्त ठेके प्रक्रिया में ही जमकर झोल हैं, क्योंकि नियम कायदों के अनुसार किसी भी ठेकदाता एजेंसी को अधिकतम 180 दिनों का समय दिया जाता हैं। ताकि जरूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएं। लेकिन सुपीरियर सर्विसेज एडवायइजिग कंपनी जो कि अब PRJ OOH की ही एक फर्म हैं। कुल तीन सालों से ज्यादा का समय दे दिया हैं। अब इधर उक्त ठेका प्रक्रिया को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और मेयर पुष्यमित्र भार्गव सो रहे हैं। या उन्हें भी एजेंसी ने कोई गोली खिला दी हैं। ताकि इंदौर नगर निम के यह जिम्मेदार सोते ही रहे। कोई भी कार्यवाही नहीं करें।

नियम कहते कुछ,अधिकारियों ने कर दिया कुछ!

दरअसल,निविदा शर्त के नियम कहते हैं कि किसी भी निविदा प्रक्रिया के तहत चयनित एजेंसी को कार्य शुरू करने के लिए कुल ज्यादा से ज्यादा 180 दिनों का समय दिया जा सकता हैं। लेकिन इंदौर नगर निगम मार्केट विभाग अपर आयुक्त आकाश सिंह,उपायुक्त मार्केट विभाग द्वारा जारी आदेश में सुपीरियर सर्विसेज एडवरटाइजिंग कंपनी को 2021 के जारी निविदा प्रक्रिया के तहत चयनित आधार पर BOT का ठेका साल 2025 को दिया गया। जबकि यह नियम कायदों की सीधी अवहेलना हैं।

ऐसी क्या गरज,सिर्फ एक ही एजेंसी को इतना समय, मौका।

इंदौर नगर निगम मार्केट विभाग द्वारा PRJ OOH की सुपीरियर सर्विसेज एडवरटाइजिंग कंपनी एजेंसी को साल 2021 से अभी तक चार से पांच बात पत्र जारी किया गया। बार बार एक ही एजेंसी को महत्व देना। बड़ी बहुत बड़ी बाँट को उत्पन्न करता हैं। क्योंकि इंदौर को लेकर बताया जाता है कि फिलहाल यहां इंदौर नगर निगम और इंदौर शहर में PRJ OOH का ही एकतरफा कब्जा हैं। खुद इंदौर निगम मार्केट विभाग के अधिकारी अन्य किसी एजेंसी को फटकने नहीं देते हैं। छोटी से छोटी खामियां निकालते हुए कॉम्पिटीटर एजेंसी को बाहर कर देते हैं।

मेयर पुष्यमित्र भार्गव,निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सो रहे हैं!

इधर शहर में यूनिपोल लॉलीपॉप की अचानक आई बाढ़ को देखते हुए भी सो रहे हैं। उन्हें दिख नहीं रहा हैं कि शहर में अवैध होर्डिंगबाजो की बजाय इंदौर नगर निगम अधिकारियों द्वारा पोषित PRJ OOH और सुपीरियर सर्विसेज एडवरटाइजिंग कंपनी के बेतहाशा यूनिपोल लॉलीपॉप की बाढ़ आ गई हैं। आगे इस संख्या को लेकर भी खुलासा किया जाएगा। लेकिन जब खुद इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को इस मामले की पूरी भनक है तो फ़िर निगम मार्केट विभागीय अमले को रोकने की बजाय वह चुपचाप क्यों बैठ गए हैं। इसके अलावा निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल भी हाथ पर हाथ धरकर बैठे हुए हैं। लेकिन शहर में आई अवैध टेंडर प्रक्रिया के तहत आई PRJ OOH सुपीरियर सर्विसेज एडवरटाइजिंग कंपनी पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं।

प्रमुख आरोप और अनियमिताएं

एकाधिकार और पक्षपात: इंदौर नगर निगम क्षेत्र में ‘PRJ OOH’ (पूर्व नाम: सुपीरियर सर्विसेज एडवरटाइजिंग कंपनी) का एकतरफा कब्जा स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रतिस्पर्धा को कुचलना: मार्केट विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि वे अन्य प्रतिस्पर्धी एजेंसियों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के लिए जानबूझकर छोटी-छोटी तकनीकी कमियां निकालते हैं।

अधिकारियों की भूमिका:

इस पूरे मामले में अपर आयुक्त आकाश सिंह और विभागीय कर्मचारी राकेश चौहान सहित अन्य स्टाफ की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए गए हैं। टेंडर नियमों का उल्लंघन: वर्ष 2021 के विज्ञापन टेंडर को बिना किसी ठोस वैधानिक आधार के बार-बार समय-अवधि (मोहलत) बढ़ाई गई है, जो वित्तीय नियमों के विरुद्ध है।

शहर को बनाया बदसूरत।

नियमों को दरकिनार कर शहर भर में ‘यूनीपोल लॉलीपॉप’ (छोटे विज्ञापन बोर्ड) की बाढ़ ला दी गई है, जिससे शहर के सौंदर्य को नुकसान पहुंच रहा है।

जिम्मेदार पदों पर बैठे नेतृत्व की चुप्पी

इस पूरे कथित घोटाले को लेकर शहर के प्रथम नागरिक और महापौर पुष्यमित्र भार्गव तथा नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, मामले की भनक होने के बावजूद निगम प्रशासन के शीर्ष स्तर से अब तक मार्केट विभाग के अमले और अवैध होर्डिंगबाजों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह मांग उठ रही है कि वर्ष 2021 से लेकर अब तक दिए गए सभी विज्ञापन टेंडरों और उनकी बढ़ाई गई अवधियों की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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