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INDORE, कोई जान जाए तो ही जागेंगे क्या जिम्मेदार? हाईकोर्ट में याचिका,बेखौफ अवैध यूनीपोल लॉलीपॉप और होर्डिंग,सड़क,डिवाईडर,पर नियमों को चुनौती दे PRJ OOH, सुपीरियर सर्विसेज एडवायइजिग कंपनी

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कोई जान जाए, तब जागेगा सिस्टम? हाईकोर्ट में याचिका के बावजूद बेखौफ अवैध यूनिपोल-लॉलीपॉप और होर्डिंग!

इंदौर में सड़क, फुटपाथ और डिवाइडरों पर नियमों को चुनौती देते विज्ञापन ढांचे; जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

शहर में अवैध यूनिपोल, लॉलीपॉप और होर्डिंग का मुद्दा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सवाल केवल शहर की सुंदरता या विज्ञापन व्यवस्था का नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और संभावित जनहानि का भी है। आरोप है कि नियमों और निर्धारित आकार से अलग कई स्थानों पर विज्ञापन संरचनाएं खड़ी हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे और जनहानि के बाद ही नगर निगम का सिस्टम जागेगा?

फुटपाथ से लेकर डिवाइडर तक सवाल

शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़क किनारे, फुटपाथों और डिवाइडरों पर लगाए गए यूनिपोल और लॉलीपॉप को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ विज्ञापन ढांचे निर्धारित साइज और दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं और कई जगह सड़क की ओर निकले हुए दिखाई देते हैं। ऐसी स्थिति में वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तेज हवा, बारिश या अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों में बड़े विज्ञापन ढांचे कितने सुरक्षित हैं—इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

हाईकोर्ट में याचिका, फिर भी सवाल कायम

अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर को लेकर इंदौर में हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता ने अवैध होर्डिंग आदि हटाने की मांग करते हुए कार्रवाई का खर्च संबंधित लोगों से वसूलने की मांग की है। ऐसे में सवाल यह है कि जब मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है और अवैध विज्ञापन संरचनाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई कितनी हुई?

आउटडोर मीडिया व्यवस्था पहले भी सवालों में

इंदौर में यूनिपोल और होर्डिंग की व्यवस्था पहले भी विवादों में रही है। एक रिपोर्ट में आउटडोर मीडिया पॉलिसी के विपरीत अनुबंध अवधि और यूनिपोल लगाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। उसी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि जहां जान-माल के नुकसान की आशंका हो, वहां यूनिपोल लगाने पर रोक संबंधी प्रावधान हैं। यानी सवाल नया नहीं है। सवाल यह है कि पुराने सवालों से सबक लेकर व्यवस्था सुधरी या सिर्फ फाइलों में नियम मौजूद हैं?

PRJ OOH और मार्केट विभाग की भूमिका पर सवाल

विज्ञापन व्यवस्था से जुड़ी PRJ OOH / Superior Services Advertising जैसी एजेंसियों की भूमिका, उनके अधिकार क्षेत्र, अनुमति, निर्धारित आकार और लगाए गए विज्ञापन ढांचों की वैधता की जांच की जरूरत बताई जा रही है। साथ ही नगर निगम के मार्केट विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात कही जा रही है।
यदि किसी यूनिपोल या लॉलीपॉप की अनुमति है तो उसका स्थान, आकार, संरचनात्मक सुरक्षा, अवधि और शुल्क क्या है।इन सभी का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।

राजस्व अपर आयुक्त,राकेश चौहान के नाम पर भी उठ रहे सवाल!

इस पूरे मामले में निगम अधिकारी-कर्मचारी राकेश चौहान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके संबंध में लगाए जा रहे व्यक्तिगत संपत्ति संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इन आरोपों की जांच संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही होनी चाहिए।

सीधा सवाल—हादसे का इंतजार क्यों?

इंदौर में यदि कोई यूनिपोल या लॉलीपॉप वास्तव में नियमों के विपरीत लगा है, सड़क या फुटपाथ की सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है अथवा निर्धारित आकार से बड़ा है, तो कार्रवाई हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले होनी चाहिए क्योंकि सवाल किसी एक कंपनी, अधिकारी या विभाग का नहीं है।

सवाल ऐसे जिनके अब इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों से चाहिए मुक्कमल जवाब।

क्या नगर निगम यह सुनिश्चित करेगा कि शहर में लगे हर यूनिपोल, लॉलीपॉप और होर्डिंग का सुरक्षा ऑडिट हो? क्या निर्धारित साइज और अनुमति से बाहर लगे विज्ञापन ढांचे तत्काल हटाए जाएंगे? क्या मार्केट विभाग जिम्मेदारी तय करेगा? और सबसे बड़ा सवाल क्या इंदौर को कार्रवाई के लिए किसी हादसे का इंतजार करना पड़ेगा? न्यूज WITH तड़का डॉट कॉम की पड़ताल में अब इन सवालों के जवाब जल्द ही आपके सामने होंगे।

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