Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
Palamu News: करोड़ों की 'आई ऑन व्हील्स' गाड़ियां धूल फांक रहीं, पलामू में सरकारी धन की बर्बादी Bokaro Murder Case: प्रेमिका की हत्या कर कुएं में फेंका शव, आरोपी तूफान मांझी को उम्रकैद की सजा नगर निगम चुनाव 2026: मोहाली में निजी संस्थानों के कर्मचारियों के लिए अवकाश की मांग, भाजपा का बड़ा बय... High Court Decision: रिश्वतखोरी मामले में FCI कर्मचारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति बरकरार, हाईकोर्ट का ... Ludhiana Snatching News: लुधियाना में महिला से 3 तोले सोने के गहने झपटने वाले 2 बदमाश गिरफ्तार Jalandhar News: AAP विधायक रमन अरोड़ा ने लौटाई सरकारी सुरक्षा, पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप Punjab Civic Body Elections 2026: पंजाब में 26 मई को नगर निगम चुनाव, बीजेपी ने जारी की उम्मीदवारों क... Noorpur Bedi News: नूरपुरबेदी गोलीकांड में बड़ी कार्रवाई, मुख्य आरोपी के पिता समेत 2 और गिरफ्तार Ludhiana Crime: लुधियाना में ई-रिक्शा चालक के घर डाका, गेट बाहर से बांधकर बैटरियां ले उड़े चोर हाजीपुर शराब तस्करी: पुलिस को देख कार छोड़ भागा तस्कर, रॉयल स्टैग और मैकडॉवल समेत भारी खेप जब्त

Ujjain News: उज्जैन की 18 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों का होगा डिजिटलाइजेशन, ‘ज्ञान भारतम’ के तहत बड़ी पहल

4

उज्जैन। अवंतिका नगरी उज्जैन, जो युगों-युगों से ज्ञान और विज्ञान का केंद्र रही है, अब अपनी प्राचीन विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ सहेजने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुए ‘ज्ञान भारतम’ प्रकल्प के अंतर्गत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय और सिंधिया प्राच्य विद्या शोध संस्थान में संरक्षित हजारों वर्ष पुरानी 18 हजार से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। यानी भोजपत्र और ताड़पत्र पर लिखित दुर्लभ ग्रंथों की हाई-डेफिनिशन स्कैनिंग कर इंटरनेट पर अपलोड की जा रही है।

🖋️ क्या है पांडुलिपि? भारत के प्राचीन ज्ञान का अनमोल खजाना

मालूम हो कि पांडुलिपि (मनुस्क्रीप्ट) वह दस्तावेज है, जो छापाखाने के आविष्कार से पहले ऋषियों, विद्वानों और वैज्ञानिकों द्वारा अपने हाथों से भोजपत्र, ताड़पत्र या हस्तनिर्मित कागजों पर लिखा गया था। इनमें भारत का प्राचीन खगोल विज्ञान, गणित, आयुर्वेद, योग, साहित्य, दर्शन, धार्मिक ग्रंथ और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का अमूल्य ज्ञान संचित है। ये हमारी सभ्यता और विज्ञान के मौलिक आधार हैं।

🌐 आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षण: सभ्यता और विज्ञान की कड़ी

इन दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण इसलिए अनिवार्य है क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे गौरवशाली इतिहास की कड़ी हैं। समय के साथ भोजपत्र और ताड़पत्र कमजोर होने लगते हैं, ऐसे में हाई-डेफिनिशन स्कैनिंग के माध्यम से इन्हें डिजिटल स्वरूप में सहेजना दुनिया भर के शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए वरदान साबित होगा। ‘ज्ञान भारतम’ प्रोजेक्ट के माध्यम से उज्जैन एक बार फिर वैश्विक पटल पर ज्ञान के केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

🔬 आधुनिक तकनीक और प्राचीन लिपि का संगम

इस प्रोजेक्ट में विशेष सॉफ्टवेयर और कैमरों का उपयोग किया जा रहा है ताकि प्राचीन स्याही और अक्षरों की स्पष्टता बनी रहे। विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों की टीमें दिन-रात इस कार्य में जुटी हैं। डिजिटल लाइब्रेरी बनने के बाद, कोई भी व्यक्ति घर बैठे इन ग्रंथों का अध्ययन कर सकेगा, जिससे भारत के प्राचीन विज्ञान और दर्शन का प्रचार-प्रसार वैश्विक स्तर पर सुलभ हो जाएगा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!