Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
Ludhiana Railway Station: लुधियाना रेलवे स्टेशन पर 2 युवक काबू, 50 लाख की नकदी बरामद, इनकम टैक्स की ... Charkhi Dadri: ऑपरेशन सिंदूर के हीरो मनोहर सिंह फोगाट का निधन, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार Faridabad News: फरीदाबाद में तेज आंधी का कहर, चौथी मंजिल की दीवार गिरने से मां और 3 बच्चे घायल Yamunanagar News: यमुनानगर में 13 साल के मासूम ने की खुदकुशी, 5वीं के छात्र की मौत से गांधी नगर में ... Barada Crime: अमनदीप कौर हत्याकांड का खुलासा, कोल्ड ड्रिंक में जहर देकर सिरमौर में जलाया शव Rewari News: क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का दबदबा, टॉप 300 में बनाई जगह Yamunanagar Water Crisis: हथनीकुण्ड बैराज पर गहराया जल संकट, पानी की आवक सिर्फ 2800 क्यूसिक रही Panipat Accident: पानीपत में दर्दनाक हादसा, घर के बाहर खेल रहे 4 साल के मासूम को पिकअप ने कुचला Hisar Bijli Nigam: बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला, अब लिखित अनुमति के बिना नहीं लगेग... Haryana Weather Alert: हरियाणा में गर्मी का सितम, 17 मई से लू का 'यलो अलर्ट' जारी, सिरसा सबसे गर्म

Chambal River News: चंबल नदी में छोड़े गए 83 कछुए, उसैद घाट की हेचरी में हुआ था जन्म

2

ग्वालियर। मुरैना और भिंड वन विभाग की टीम ने गुरुवार को चंबल नदी में 83 कछुओं को छोड़ा। यह कछुए मुरैना के उसैद घाट पर बनाई गई अस्थायी हेचरी में पाले गए थे। गुरुवार की सुबह चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी के मुरैना डीएफओ हरीश बघेल और भिंड के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने इन कछुओं को चंबल नदी के घाट पर छोड़ा। जैसे ही इन्हें छोड़ा गया, ये नन्हे कछुए दौड़ लगाते हुए पानी की ओर बढ़े और पलक झपकते ही गहरे पानी में समा गए।

🥚 टापुओं से अंडों का संग्रह: ऐसे होता है कछुओं का सुरक्षित जन्म

बता दें कि चंबल नदी के टापुओं से कछुओं के अंडों को इकट्ठा करके अस्थायी हेचरी में इनका जन्म करवाया जाता है और यहीं इनकी देखभाल की जाती है। यह प्रक्रिया कछुओं के अस्तित्व को बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राकृतिक परिवेश में अंडों के नष्ट होने का खतरा अधिक रहता है। सुरक्षित वातावरण में जन्म होने से इनकी जीवित रहने की दर काफी बढ़ जाती है।

🌊 राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की बड़ी उपलब्धि: 7344 कछुओं को मिला नया घर

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में कुल चार अस्थाई कछुआ हेचरी संचालित हैं, जो बरोली घाट, बटेशवरा घाट, उसैद घाट एवं सांकरी घाट पर स्थित हैं। इन चारों हेचरी से अब तक कुल 7344 कछुए ‘हेंच’ (पैदा) हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास (नदी) में छोड़ा गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ नेस्ट (घोंसलों) में अभी हेचिंग होना शेष है, जिससे यह संख्या और बढ़ेगी।

🛡️ वन्यजीव संरक्षण: चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी की सक्रियता

चंबल नदी न केवल घड़ियालों बल्कि दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के लिए भी एक सुरक्षित शरणस्थली है। डीएफओ और अधीक्षक के नेतृत्व में चल रही यह मुहिम दर्शाती है कि पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने के लिए विभाग किस तरह तकनीकी और जमीनी स्तर पर प्रयास कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों को भी इन कछुओं और उनके अंडों की सुरक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है ताकि अवैध तस्करी और मानवीय दखल को रोका जा सके।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!