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Barnawapara Wildlife Sanctuary: छत्तीसगढ़ के बारनवापारा में काले हिरणों का पुनर्जन्म, विलुप्ति की कगार से 200 तक पहुंची संख्या

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बलौदाबाजार भाटापारा: लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में उभरा है. एक समय ऐसा था जब यह अभयारण्य अपने प्रमुख वन्यजीव काले हिरण से लगभग खाली हो चुका था. लेकिन अब यही क्षेत्र करीब 200 काले हिरणों (ब्लैकबक) का सुरक्षित आवास बन गया है.

विलुप्त हो रहे काले हिरणों को बचाने की मुहिम रंग लाई

छत्तीसगढ़ में इस उपलब्धि तक पहुंचने की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही है. 1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास के नुकसान के कारण काले हिरण इस क्षेत्र से लगभग समाप्त हो गए थे और करीब पांच दशकों तक यहां स्थानीय रूप से विलुप्त रहे. अप्रैल 2018 में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक में पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आया. इसके बाद एक योजना के तहत काले हिरणों को फिर से बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई. इसी प्रयास के परिणामस्वरूप उनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंची.

वन अधिकारियों के अनुसार, निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हुई, जिसके बाद प्रबंधन प्रणाली में सुधार किए गए. बाड़ों में मजबूत सतह के लिए रेत की परत बिछाई गई, जलभराव रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था विकसित की गई, अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया गया और एक पशु चिकित्सक की नियुक्ति की गई.

बारनवापारा अभयारण्य में इस समय लगभग 200 काले हिरण

इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप काले हिरणों की आबादी पहले स्थिर हुई और फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगी. बेहतर पोषण, नियमित निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण आज इनकी संख्या लगभग 200 तक पहुंच चुकी है.

पीएम मोदी ने मन की बात में काले हिरण का किया जिक्र

छत्तीसगढ़ के काले हिरण के संरक्षण प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी सराहना की. इसने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को सुदृढ़ किया है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोगों का मनोबल भी बढ़ाया है.

छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेख होना राज्य के लिए विशेष सम्मान का विषय है. इससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता मजबूत है. यह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है- विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

काला हिरण को जानिए

काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है. नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है. मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते. यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है. इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं. इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है. नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है. नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं.

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