भोपाल: राजधानी भोपाल में एक बार फिर बड़ा हादसा उस वक्त टल गया, जब लोक भवन के ठीक सामने सड़क धंस गई. घटना के पीछे पानी की पाइपलाइन फटना बताया जा रहा है, जिससे देखते ही देखते इलाके में जलभराव हो गया. पानी का बहाव इतना तेज़ था कि लोग निकलते वक़्त गिरने लगे. सड़क धसने के बाद कोई भी जिम्मेदार सामने नहीं आया.
मध्य प्रदेश की राजधानी के इन दिनों बुरे हाल हैं. कही ब्रिज पर दरार आ जाती है तो कही जमीन धंस जाती है. अब लोक भवन के सामने वाली सड़क 150 मीटर अंदर धस गयी. जिससे बड़ा हादसा होते होते टल गया. बताया जा रहा है की सड़क के नीचे पाइप लाइन है जो फट गयी थी जिससे पानी का बहाव तेज़ हो गया और पानी के साथ मलवा भी सड़क पर आ गया. इस सड़क पर कई वीआईपी लोगों का मूवमेंट होता है. वहीं, हजारों लोग यहां से गुजरते हैं पास ही मिंटो हॉल, पीएचक्यू है. अक्सर यहां कार्यकम भी होते रहते हैं.
अचानक धंसी सड़क, भर गया पानी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिस समय सड़क धंसी उस वक्त वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था, वरना गंभीर हादसा हो सकता था. जानकारी के मुताबिक, घाटी से बड़ा तालाब की ओर जाने वाली बिना फिल्टर पानी की पाइपलाइन अचानक फट गई. जिससे तेज प्रेशर से पानी बहने लगा, जिससे सड़क का करीब 150 मीटर हिस्सा धंस गया और पूरी सड़क पर लगभग एक फीट तक पानी भर गया. देखते ही देखते सड़क तालाब जैसी नजर आने लगी.
हैरानी की बात यह रही कि सड़क धंसने और पाइपलाइन फूटने के बावजूद समय पर ट्रैफिक डायवर्ट नहीं किया गया. इस दौरान कई वाहन जर्जर हिस्से के ऊपर से गुजरते रहे, जिससे बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहा. इसी दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का काफिला भी इसी रास्ते से गुजरा. बाद में पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ते को बंद कर दिया और ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया. वहीं इसी सड़क पर युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किया और इसे भ्रष्टाचार की सड़क बताया.
नगर निगम जलकार्य विभाग के प्रभारी उदित गर्ग मौके पर पहुंचे. जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने कैमरे के सामने तो कुछ भी नहीं कहा. लेकिन इतना जरूर बताया, ”यहां से हैवी ट्रक निकलते हैं, जिसके कारण इस प्रकार की घटना घटित हुई है. इसकी हम जांच करवा रहे हैं यह सड़क पीडब्ल्यूडी के द्वारा बनाई गई है.” घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं. समय रहते ट्रैफिक रोका जाता और इलाके को घेरा जाता तो खतरा कम किया जा सकता था.
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