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नगर निगम में विवादों को जन्म देते निगमायुक्त के आदेश,चंदन नगर नामकरण मामला में बीच जांच के दौरान बहाली हो या फिर किरकिरी करने वाले उपयंत्री को उपकृत करना,आखिर निगम कमिश्नर को एसो से क्या मीठा!

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विवाद ही विवाद, विवादित निगम अधिकारियों को उपकृत की बहार,सरकार विरोधी कार्य करने वाले वैभव देवलासे,मनीषा राणा सहित पांच इंजीनियर को मलाईदार विभाग। निगम आयुक्त का आखिर एसो को क्यों संरक्षण, उठ रहे सवालात।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

चंदन नगर नामकरण मामला हो या अन्य ऐसे उपयंत्री जो नेताओं की आंख की किरकिरी बने हुए थे। उन्हें निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने उपकृत करते हुए बहाल तो कर दिया साथ ही साथ उन्हें मलाईदार विभागों और जोन तक दे डाले। यहीं नहीं जो उपयंत्री जो खुद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की साख का विषय थे। उन्हें भी लूप लाइन से हटाकर अमृत योजना, जनकार्य विभाग, भवन अनुज्ञा जैसे प्रमुख विभागों की कमान सौंप दी। लिहाजा ऐसे आदेशों के चलते खुद निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव विवादों को जन्म दे रहे हैं। क्योंकि उनके द्वारा निकाले जा रहे आदेश ही विवादों की प्रमुख वजह हैं।

चंदन नगर नामकरण मामला,जांच के बीच बहाली।

इधर चंदन नगर नामकरण मामले में वैभव देवलासे और मनीषा राणा पर भाजपा सरकार विरोधी कार्य करने तक के आरोप लगाए जा चुके हैं। इधर खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री पुत्र पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय सख्त कार्यवाही और FIR तक की बातें कह चुके हैं। लेकिन इस बीच चलती जांच के बीच निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने वैभव देवलासे, मनीषा राणा को बहाल कर दिया। जिसके बाद परिषद बैठक में खुद भाजपा पार्षद महेश चौधरी ने तो निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव को घेर दिया था। बैठक में निगमायुक्त के पास कोई जवाब नहीं था। लेकिन परिषद बैठक में वो सात दिनों के तय समय सीमा के बावजूद भी इन दोनों ही अधिकारियों का कुछ नहीं हुआ। लिहाजा विवादित स्थिति तो बननी ही थी।

किसी के भी घरों में बिना अनुमति सूचना गलत ही तो है।

कर निर्धारण के सर्वे के लिए भंवरकुआ क्षेत्र में पहुंचे निगम अमले ने बिना कोई सूचना,बिना अनुमति और बिना कोई नोटिस के किसी की निजी संपत्ति में दखल देना तो गलत ही हैं। लेकिन। निगमायुक्त ने इस एंगल पर कोई ध्यान नहीं दिया। बल्कि अमले को गलती करने की खुली छूट दी। जिसकी वजह से जनप्रतिनिधि और निगम अमला आमने सामने हो गया।

निगम की किरकिरी करने वालों को ईनाम।

इधर जिन उपयंत्री जिनमें विनोद अग्रवाल,अतीक खान,शैलेन्द्र मिश्रा,अभिषेक सिंह,प्रभात तिवारी, राहुल रघुवंशी और शिवराज सिंह यादव की वसूली मनमानी, जैसी शिकायतों के बाद इंदौर नगर निगम से रवानगी की गई थी। और यह हाइकोर्ट से स्टे ले आए थे। स्टे के बाद लुपलाइन में डाले गए इन सभी उपयंत्री को निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने प्रमुख विभागों में सेट कर दिया। जो कि अब सभी की आंखों में खटक तो रहा ही हैं। साथ ही साथ अब जनता भी पूछ रही है कि आखिर नगर निगम इंदौर में चल क्या रहा है ?

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