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INDORE इंदौर विकास प्राधिकरण की सुरक्षा में सेंध,सिक्युरिटी गार्ड टेंडर में भ्रष्टाचार! अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर प्रक्रिया में हो गया बदलाव,ब्लैकलिस्टेड बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्युरिटी इंडिया को सेट करने में लगे प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल!

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IDA की सुरक्षा में सेंध,सिक्युरिटी गार्ड टेंडर में भ्रष्टाचार? अधिकारियों की मिलीभगत के चलते निविदा शर्तों में बदलाव,ब्लैकलिस्टेड कंपनी बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्युरिटी इंडिया को लाभ पहुंचाने में जुटे प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल!

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी सुरक्षा गार्ड टेंडर प्रक्रिया में झोल करने की पूरी तैयारी की जा रही हैं। वह इसलिए क्योंकि IDA ने दिनांक 20.11.2024 को सुरक्षा एजेंसी के चयन हेतु निविदा आमंत्रित की थी। जिसमें बॉम्बे की सिक्योरिटी एजेंसी बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्युरिटी इंडिया का चयन किया गया था। लेकिन उक्त कंपनी के कई शासकीय और अर्धशासकीय संस्थाओं द्वारा ब्लैकलिस्टेड किए जाने की जानकारी मिलने पर उक्त निविदा प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया गया था। लेकिन अभी वर्तमान में इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा सुरक्षा एजेंसी के चयन के लिए दोबारा 18.04.2026 को निविदा आमंत्रित की। जिसमें निविदा शर्तों को ही बदल दिया गया। और सूत्र तो यहां तक बता रहे है कि इंदौर विकास प्राधिकरण के ही प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल सहित अन्य अमला पिछली प्रक्रिया में निविदा निरस्ती झेल चुकी बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्युरिटी इंडिया को ida में दोबारा काबिज करने के लिए शर्तों को ही बदल चुके हैं। फिलहाल उक्त मामले की मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव से लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,संभागायुक्त सुदामा खाड़े सहित खुद इंदौर विकास प्राधिकरण सीईओ डॉक्टर परीक्षित झाड़े को भी शिकायत हो चुकी हैं। लेकिन उक्त शिकायत को लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया हैं।

 

पोरवाल की लंबी सेटिंग।

सिक्युरिटी एजेंसी के कामकाज की बात की जाए तो यह पूरा जिम्मा इंदौर विकास प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल की हैं। लिहाजा इंदौर विकास प्राधिकरण में पिछले 20 सालों से राजेंद्र पोरवाल के ही गुर्गे काबिज हैं। जिनमें सुपरवाइजर लवलेश मिश्रा प्रमुख हैं। आईडीए में इतने सालों में कितनी ही सुरक्षा गार्ड एजेंसिया आई हैं। लेकिन पोरवाल के खास गुर्गे लवलेश मिश्रा को कोई भी अधिकारी हटा नहीं पाया न ही कोई सुरक्षा एजेंसी। क्योंकि बताया जाता है कि पोरवाल की एक ही शर्त होती है सुरक्षा गार्ड एजेंसी कोई भी हो लेकिन सुपरवाइजर बनेगा तो सिर्फ लवलेश मिश्रा हैं। दरअसल इन्हीं वजह से ida प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल ने कई टेंडर प्रक्रिया को तक निरस्त करवा दिया। लेकिन अपने गुर्गे को यहां से हटने नहीं दिया।

सुरक्षा गार्ड सेलरी में होता है लंबा खेल।
इंदौर विकास प्राधिकरण के ही विश्वनीय सूत्र बताते है कि सुरक्षा गार्डो की प्रतिमाह दी जाने वाली सेलरी को लेकर भी बड़ा खेला होता है। क्योंकि खुद राजेंद्र पोरवाल उससे जुड़े लोगों को एक नहीं बल्कि दो दो तीन गार्डों की सैलरी का कम्पनियों से भुगतान करवाते हैं। जिनमें पोरवाल का ड्राइवर और के पी सिंह प्रमुख है। अगर उक्त मामले की जांच होती है तो बड़े आर्थिक गबन की पोल खुल जाएगी।

बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्युरिटी इंडिया को टेंडर दिलवाने पर चल रहा जोर।

इंदौर विकास प्राधिकरण में सुरक्षा में सेंध लगाई जा रही हैं। दरअसल सिक्युरिटी गार्ड टेंडर में भ्रष्टाचार की बू भी आ रही हैं क्योंकि उक्त प्रक्रिया में की गई शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार इस और कोई ठोस कदम उठाने से बच रहे हैं। बताया तो यहां तक जा रहा है कि उक्त बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्युरिटी इंडिया को टेंडर का लाभ देने के लिए ida प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र पोरवाल ने निविदा शर्तों में ही बदलाव कर डाला।

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