INDORE फिर ठगाया यादव परिवार,चिंटू को हटाकर सोनाली को नेता प्रतिपक्ष की कमान,पीसीसी चीफ पटवारी की मनमर्जी से आक्रोशित कांग्रेसी,जीतू कर रहे सिर्फ अपने ही मन की।
फिर ठगाया यादव परिवार,चिंटू को हटाकर सोनाली मिमरोट को नेताप्रतिपक्ष की कमान।
आक्रोश में अधिकांश कांग्रेसी,पटवारी पर फुट रहा गुस्सा,करते है सिर्फ अपने मन की।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
इंदौर हो या भोपाल या फिर प्रदेश का कोई सा भी कोना यहां चलती तो सिर्फ जीतू पटवारी की ही हैं। फिर भले कांग्रेसी चीखते चिल्लाते कितना भी विरोध करे लेकिन होगा वहीं जो पटवारी चाहते हैं। नहीं तो फिर भी नहीं होगा। कुछ ऐसा ही निर्णय फिलहाल इंदौर नगर निगम नेता प्रतिपक्ष को लेकर लिया गया हैं। जिससे कांग्रेसी काफी ज्यादा नाराज नजर आ रहे हैं। क्योंकि दो पदों पर बैठे चिंटू चौकसे को लेकर इंदौर शहर कांग्रेसी पहले ही खफा थे। लेकिन अब जो चिंटू को हटाकर को जीतू पटवारी ने फैसला लिया उससे और कहीं ज़्यादा कांग्रेसी पार्टी से रुष्ठ हो गए हैं। यही नहीं उक्त मामले के दौरान अब शहर ने कई ऐसे कांग्रेसी है जिन्हें लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है कि ये कहीं भाजपा में न चले जाए। क्योंकि जिस तरह से जीतू पटवारी ने चिंटू चौकसे को हटाकर सोनाली मिमरोट को नेताप्रतिपक्ष बनाया हैं। उससे कांग्रेसी चाहे एक नंबर ,दो नंबर,का हो या अन्य सभी विधानसभा क्षेत्रों का उनका मानना है कि ये सीधे सीधे एक नंबर के कद्दावर कांग्रेसी यादव परिवार के साथ धोखा हैं। क्योंकि उक्त पद के लिए वार्ड 10 से तीन बार की पार्षद विनीतिका यादव प्रबल दावेदार भी थी और काबिल भी। लेकिन यकायक जीतू पटवारी ने सोनाली मिमरोट को नेताप्रतिपक्ष बना देना अब किसी को हजम नहीं हो रहा हैं। लिहाजा अब शहर ने उक्त नियुक्ति के बाद कांग्रेसियों का गुस्सा उबल रहा है और कहा तो यहां जा रहा है कि अब कहीं कांग्रेसियों के इस्तीफों की बयार न शुरू हो जाए। हालांकि खुद कांग्रेसी दीपू यादव ऐसे कांग्रेसियों को मनाने में लगे हुए है और इस्तीफे टालने की तमाम कोशिशें कर रहे हैं।

पटवारी की निगाह पांच नंबर पर।
सोनाली मिमरोट को नेताप्रतिपक्ष बनाए जाने के पीछे के खुद कांग्रेसी एक बात बार बार दोहरा रहे है कि जीतू पटवारी की निगाह पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र में हैं। जहां से खुद पटवारी चुनाव लड़ने की इच्छा रख रहे हैं। लिहाजा उक्त विधानसभा क्षेत्र के बैरवा समाज के वोटों को गणित को वह साधने में लगे हुए है और शायद इसीलिए जीतू पटवारी ने सोनाली मिमरोट को नेताप्रतिपक्ष की कमान सौंपी हैं।

खुद चिंटू का ही दांव।
इधर सोनाली मिमरोट की नियुक्ति को लेकर कांग्रेसी यह भी बता रहे है कि उक्त मामले में खुद चिंटू चौकसे का ही दांव हैं। क्योंकि कहीं न कहीं सोनाली मिमरोट के चिंटू चौकसे से राजनीतिक संबंध इसमें कामयाब साबित होगे और कहा तो यहां तक जा रहा है कि चलेगी तो फिर भी चिंटू चौकसे की ही।
पटवारी की मनमर्जी से परेशान कांग्रेसी।

इधर पहले दो पदों जिनमें शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पर पटवारी खुद की मनमर्जी चलाते हुए चिंटू चौकसे को बैठा दिया। जिसका विरोध वह नियुक्ति के बाद से झेल रहे हैं। और अब दोबारा ऐसे ही मनमर्जी के निर्णय से कांग्रेसी पार्टी से खफा हो गए हैं। जो कि अब आगामी कुछ दिनों में पार्टी को देखने को भी मिलेगा।
पूरे शहरभर में यही चर्चा, यादव परिवार के साथ हो गया गलत।

इधर नेता प्रतिपक्ष सोनाली मिमरोट को बनाए जाने के बाद अब शहरभर में यही चर्चा जोर पकड़ रही है कि यादव परिवार के साथ हर मामले में छल हो रहा हैं। पहले दीपू यादव को शहर कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाना,और अब प्रबल दावेदार विनीतिका यादव को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाना ये यादव परिवार के साथ अन्याय हो रहा हैं।
