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Dental Health News: इंदौर के बच्चों में बढ़ी दांतों की गंभीर बीमारियाँ; 75% बच्चों में मिल रही कैविटी, जानें कारण

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इंदौर: बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों का बुरा असर अब बच्चों के स्वास्थ्य, विशेषकर उनके दांतों पर पड़ रहा है। शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के शिशु एवं बाल दंत रोग विभाग के हालिया आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान 16 हजार से अधिक बच्चे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, जिनमें से अधिकतर को फिलिंग और रूट कैनाल जैसे उपचारों की आवश्यकता पड़ी। चिंता का मुख्य विषय यह है कि इनमें से लगभग 75 फीसदी बच्चों के दांतों में सड़न यानी ‘कैविटी’ (Cavity) पाई गई है।

🍟 क्यों खराब हो रहे हैं बच्चों के दांत?

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में दांतों की समस्या केवल मीठा खाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं:

  • मैदा और प्रोसेस्ड फूड: मैदा से बनी चीजें, बिस्कुट और अन्य पैकेज्ड स्नैक्स दांतों में चिपक जाते हैं, जिससे सड़न तेजी से बढ़ती है।

  • चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक्स: इनका अत्यधिक सेवन दांतों के इनेमल को कमजोर कर रहा है।

  • लापरवाही: नियमित रूप से ब्रश न करना और समय पर दंत चिकित्सक से जांच न करवाना स्थिति को और जटिल बना रहा है।

⚠️ अभिभावकों के लिए सतर्कता जरूरी

दंत रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के दांतों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है। यदि बच्चों के दांतों में हल्का सा भी दर्द या कालापन दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। स्वस्थ दांतों के लिए बच्चों को जंक फूड से दूर रखने के साथ-साथ उन्हें कम से कम दिन में दो बार ब्रश करने की आदत डालना अनिवार्य है। समय रहते की गई जांच ही दांतों को भविष्य में रूट कैनाल जैसे बड़े उपचारों से बचा सकती है।

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