Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
INDORE नगर निगम मार्केट विभाग की अवैध विज्ञापनबाजों को खुली छूट! उल्लंघन करो और नाममात्र खानापूर्ति ... INDORE कनाडिया पुलिस के हत्थे चढ़ा ड्रग तस्करों का बड़ा नेटवर्क,16 लाख रुपए की एमडी ड्रग सहित कार बर... INDORE कनाडिया पुलिस पकड़े महंगे शौक के लिए मोबाइल झपटने वाले दो चोर,फिलहाल पूछताछ जारी खुलेंगे और क... INDORE मुख्यमंत्री के प्रभार का शहर,खतरे में इंदौर की जनता, ना निगमायुक्त को फ़िक्र,न किसी और को चिंत... दतिया उपचुनाव mp में नहीं बदलेगा टिकट, भाजपा का क्लेश ख़त्म! सीएम,प्रदेश अध्यक्ष,नरोत्तम मिश्रा की ब... दतिया उपचुनाव,भाजपा में बगावती दौर,वरिष्ठ नेता लगे डेमेज कंट्रोल में,नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक वनवा... INDORE आईडीए में फर्जीवाड़ा,गिरोह के तीन सदस्य धराएं,एक गिरोह अभी भी पुलिस की जद से बाहर,तीन आरोपित ... INDORE पार्ट 4, पर्यावरण का दुश्मन रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप कर्ताधर्ता और विकासकर्ता,गिट्टी मुरम चो... INDORE महाजाम से परेशान आमजनता,कलेक्टर ने संभाला मोर्चा,MPRDC,मेट्रो,PWD,IDA के अधूरे निर्माण बनी मु... INDORE पार्ट THREE पर्यावरण का दुश्मन रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप,सरकारी जमीन निजी सड़क,तालाब पर कब्ज़ा...

Supreme Court Verdict: एसआईआर की संवैधानिक वैधता पर कोर्ट का फैसला; अभिषेक मनु सिंघवी बोले- ‘चुनाव आयोग की खामियों पर नहीं हुई टिप्पणी’

20

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर (SIR) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोर्ट के फैसले का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि भले ही कोर्ट ने वैधता को मान लिया है, लेकिन इस फैसले ने कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अभी मिलना बाकी है।

🗳️ ‘नागरिकता का निर्णय लेने वाली अंतिम संस्था चुनाव आयोग नहीं’

सिंघवी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकता के विषय में चुनाव आयोग अंतिम संस्था नहीं है। उन्होंने कहा, “जहां नागरिकता का प्रश्न उठता है, वहां चुनाव आयोग को यह मुद्दा गृह मंत्रालय जैसे सक्षम प्राधिकारी को रेफर करना होगा और उनका निर्णय ही बाध्यकारी होगा।” सिंघवी के अनुसार, चुनाव आयोग केवल प्रशासनिक स्तर पर ही इस मामले को देख सकता है।

❓ 7.5 करोड़ लोगों का मताधिकार कैसे छीना गया?

कांग्रेस नेता ने एक बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर चुनाव आयोग के पास नागरिकता पर अंतिम निर्णय का अधिकार नहीं था, तो फिर विभिन्न राज्यों में 7.5 करोड़ लोगों को मताधिकार से वंचित क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि बिहार में 65 लाख निष्कासन (डिलीशन) हुए थे, जिनके नाम दोबारा प्रकाशित करने और कारण स्पष्ट करने की प्रक्रिया तभी संभव हो पाई, जब राजनीतिक दलों और एनजीओ ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने जल्दबाजी में खामियों के साथ प्रोग्राम लॉन्च किया था।

📉 कोर्ट की टिप्पणी न होने पर जताया दुख

अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की उन गंभीर खामियों पर कोई टिप्पणी नहीं की, जिनके कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन खामियों में सुधार केवल इसलिए हो सका क्योंकि सिविल सोसायटी, राजनीतिक दलों और एनजीओ ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बताया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!