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Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

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रायपुर/दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार राज्य के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को नियमित जमानत दे दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि छत्तीसगढ़ शराब नीति घोटाला केस से जुड़े अधिकांश अन्य सह-आरोपी पहले से ही कानूनी जमानत पर जेल से बाहर हैं। इसके अतिरिक्त, इस वृहद मामले में कानूनी मुकदमे (ट्रायल) की पूरी सुनवाई संपन्न होने में अभी काफी लंबा वक्त लगने की गुंजाइश है। इन्हीं न्यायिक परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को और अधिक समय तक जेल में रखना उचित नहीं है।

⚖️ मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की स्पेशल बेंच ने सुनाया फैसला: ‘शराब नीति तैयार करने में निभाई थी मुख्य आरोपी जैसी भूमिका’

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की विशेष पीठ ने निरंजन दास की जमानत याचिका पर यह अहम फैसला सुनाया। हालांकि, राहत देने के साथ ही माननीय पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि निरंजन दास (जिन्हें जांच एजेंसियों द्वारा इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य किरदार और कथित मुख्य आरोपी बताया जा रहा है) ने अन्य रसूखदार सह-आरोपियों और अवैध सिंडिकेट को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने के छिपे मकसद से राज्य की तत्कालीन आबकारी नीति तैयार करने में बेहद संदेहास्पद और अहम भूमिका निभाई थी।

🚫 राज्य में प्रवेश पर पाबंदी सहित लगाई गईं कई कड़ी शर्तें: मुख्य केस और मनी लॉन्ड्रिंग दोनों मामलों में कोर्ट से मिली बड़ी राहत

सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य आपराधिक मामले और उससे जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के दो अलग-अलग मामलों में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को यह बड़ी राहत प्रदान की है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केस डायरी का अवलोकन करते हुए रेखांकित किया कि दास को क्रमशः 18 सितंबर, 2025 और 19… दिसंबर, 2025 को दोनों मामलों में गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने निरंजन दास पर भी अन्य सह-आरोपियों के समान ही कड़ी शर्तें लागू की हैं। सुनवाई कर रही बेंच ने आदेश दिया है कि जमानत के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक सीमा से पूरी तरह बाहर रहना होगा। वे केवल और केवल कोर्ट की सुनवाई में हिस्सा लेने तथा जांच एजेंसियों के समक्ष पूछताछ में शामिल होने के लिए ही छत्तीसगढ़ की धरती पर आ सकते हैं।

💼 पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी पहले मिल चुकी है राहत: जानिए क्या है 2019 से 2023 के बीच हुआ यह पूरा आबकारी घोटाला

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में आगे जोड़ते हुए कहा कि यदि आरोपी का आचरण बेहतर रहता है, तो वह बाद में जमानत की कड़े नियमों और शर्तों में छूट पाने के लिए दोबारा न्यायालय में वैधानिक अपील दायर कर सकता है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 1 मार्च को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर हाई कोर्ट) ने इसी आबकारी घोटाले से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में पदस्थ रहीं पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी नियमित जमानत दे दी थी।

वर्तमान में राज्य की आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW 17 जनवरी 2024 को आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कर इस पूरे घोटाले के आपराधिक और भ्रष्टाचार से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। जबकि दूसरी तरफ केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ED 11 अप्रैल 2024 को ईसीआईआर (ECIR) दाखिल करने के बाद इस मामले में हुए अवैध वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के कोण की गहन तफ्तीश कर रही है। ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य में साल 2019 से लेकर 2023 के बीच आबकारी नियमों को ताक पर रखकर करीब ₹2000 करोड़ से अधिक का यह कथित शराब घोटाला अंजाम दिया गया था।

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