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CREDA Recruitment Stay: मनीष गुप्ता सुप्रीम कोर्ट जजमेंट का हवाला, क्रेडा सेवाकर्ता इकाई भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट का स्टे

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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) की ओर से सेवाकर्ता इकाई के संविदा पदों के लिए जारी किए गए नए भर्ती विज्ञापन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस महत्वपूर्ण मामले की प्रारंभिक सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस बी.डी. गुरु की सिंगल बेंच में हुई। अदालत ने संविदा कर्मियों के हितों की रक्षा करते हुए विज्ञापन पर रोक लगाने के साथ-साथ ऊर्जा विभाग और क्रेडा के संबंधित उच्च अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है।

📋 प्रदेशभर के प्रभावितों ने दायर की थी याचिका: 45 से अधिक सेवाकर्ता इकाइयों ने खटखटाया था हाई कोर्ट का दरवाजा

यह महत्वपूर्ण कानूनी याचिका रायपुर के कमलेश कुमार साहू एवं अन्य 6, बेमेतरा जिले के लीलाधर साहू एवं अन्य 6, खैरागढ़-गंडई-छुईखदान जिले के नरेंद्र कुमार साहू एवं अन्य 5 तथा जांजगीर-चांपा जिले के गणेश कुमार साहू एवं अन्य 26 सेवाकर्ता इकाइयों (संविदा कर्मियों) की ओर से संयुक्त रूप से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से हाई कोर्ट में पैरवी करते हुए अधिवक्ता नरेंद्र मेहर और रूपेश साहू के द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के साथ यह रिट याचिका प्रस्तुत की गई थी।

🚫 सेवा विस्तार की जगह निकाल दिया था नया विज्ञापन: वकीलों ने दी दलील—अस्थायी कर्मचारी की जगह दूसरा अस्थायी नहीं आ सकता

दायर याचिका में पूरे मामले का विवरण देते हुए बताया गया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति सेवाकर्ता इकाई के पद पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नियमों के तहत की गई थी, जिसका अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया। आरोप है कि क्रेडा प्रबंधन ने इन अनुभवी कर्मियों को सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) देने के बजाय, उन्हीं पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करते हुए एक नया विज्ञापन जारी कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने जोरदार दलील दी कि स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुसार, किसी भी संविदा अथवा अस्थायी कर्मचारी को केवल दूसरे अस्थायी कर्मचारी की नियुक्ति करने के लिए नौकरी से हटाया नहीं जा सकता।

👩‍⚖️ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पुराने फैसलों का दिया हवाला: केवल नियमित नियुक्ति होने पर ही हटाए जा सकते हैं संविदा कर्मी

वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में केवल नियमित (परमानेंट) नियुक्ति होने पर ही पुराने संविदा कर्मचारियों को सेवा से मुक्त किया जा सकता है। अपने इस मजबूत कानूनी पक्ष के समर्थन में उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के ऐतिहासिक फैसले ‘मनीष गुप्ता विरुद्ध अध्यक्ष जनभागीदारी समिति’ तथा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के ही ‘मंजू गुप्ता विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन’ एवं ‘अंकिता नामदेव विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन’ मामलों की नजीर और फैसलों का हवाला दिया।

🚨 ऊर्जा विभाग के सचिव सहित कई अफसरों को नोटिस: पूर्व में टेक्नीशियन संविदा पदों के विज्ञापन पर भी लग चुकी है रोक

अदालत में लंबी सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी पीठ के सामने लाया गया कि पूर्व में भी क्रेडा द्वारा टेक्नीशियन के संविदा पदों के लिए जारी किए गए एक अन्य विज्ञापन पर हाई कोर्ट इसी तरह रोक लगा चुका है। वर्तमान मामले के सभी तकनीकी व विधिक पहलुओं को देखने के बाद, न्यायालय ने सेवाकर्ता इकाई पदों पर जारी वर्तमान विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही कोर्ट ने ऊर्जा विभाग के सचिव, क्रेडा के अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता (जोनल कार्यालय) तथा सहायक अभियंता को नोटिस जारी कर आगामी सुनवाई में अपना आधिकारिक जवाब प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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