Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
INDORE इंदौर विकास प्राधिकरण की सुरक्षा में सेंध,सिक्युरिटी गार्ड टेंडर में भ्रष्टाचार! अधिकारियों क... INDORE चर्चाओं में IDA का लेखा विभाग,वर्षों से जमे अंगद कर्मचारी अधिकारी,और प्रति बिल भुगतानों पर एक... INDORE निहालपुर मुंडी स्थित रॉयल ग्रीन काउंटी टाउनशिप कर्ताधर्ता बने हरियाली के दुश्मन,सरकारी जमीन प... INDORE मोहर्रम मेला निरस्त! विगत वर्ष के अनुभवों पर मेयर थे खफ़ा,इंदौर से दूर रहते हुए भी महापौर ने स... INDORE मसला C21 मॉल द्वारा अवैध विज्ञापनराशि वसूलने का,संचालक का खुल्लमखुल्ला विज्ञापन का धंधा,मामले... INDORE फिर ठगाया यादव परिवार,चिंटू को हटाकर सोनाली को नेता प्रतिपक्ष की कमान,पीसीसी चीफ पटवारी की मन... INDORE मामला C 21 मॉल का,धनबलियों के जेब नियमकायदे,इनको मदद करता मार्केट विभाग का अदना कर्मचारी,और इ... श्री श्रीगौड ब्राह्मण समाज पदाधिकारियों का पहली बार हुआ ऐतिहासिक शपथविधि समारोह,जिसमें शामिल हुए सैक... IDA को PMAY से झटका,MR 11विस्थापन पड़ी खटाई में,प्रति फ्लैट 10 लाख रुपए घाटे की योजना,गुलमोहर-अमलतास... INDORE शहर में JIO AIRTEL सहित अन्य कम्पनियों के नेटवर्क धड़ाम,आपस में चल रहा कम्पीटीशन किसका ग्राहक...

Ekadanta Sankashti Chaturthi 2026: आज है एकदंत संकष्टी चतुर्थी; जानें चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व और शुभ मुहूर्त

52

Sankashti Chaturthi Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी वंदना से होती है. गणेश जी को समर्पित व्रतों में संकष्टी चतुर्थी का विशेष स्थान है. पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 5 मई 2026 को सुबह 5:24 बजे से शुरू होकर 6 मई 2026 को सुबह 7:51 बजे तक रहेगी. चूंकि व्रत का महत्व चंद्रोदय के आधार पर होता है और 5 मई को चतुर्थी तिथि चंद्रोदय के समय विद्यमान रहेगी, इसलिए यह व्रत 5 मई 2026, मंगलवार को रखा जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरे दिन निराहार रहकर की गई यह कठिन साधना तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक कि रात में चंद्रमा को अर्घ्य न दे दिया जाए? आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और आध्यात्मिक कारण के बारे में.

चंद्रमा को अर्घ्य क्यों है जरूरी?

संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे अहम नियम है चंद्रमा को अर्घ्य देना. मान्यता है कि भगवान गणेश और चंद्रमा के बीच एक विशेष संबंध है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार चंद्रमा ने गणेश जी के स्वरूप का उपहास किया था, जिससे क्रोधित होकर गणेश जी ने उसे श्राप दे दिया. बाद में चंद्रमा ने क्षमा मांगी, तब गणेश जी ने श्राप को आंशिक रूप से समाप्त किया और कहा कि चतुर्थी के दिन जो व्यक्ति चंद्रमा को अर्घ्य देकर उनकी पूजा करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे. इसी कारण इस व्रत में चंद्र दर्शन और अर्घ्य देना अनिवार्य माना गया है. यह प्रक्रिया भगवान गणेश और चंद्रमा दोनों की कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानी जाती है.

बिना अर्घ्य के व्रत अधूरा क्यों?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत दिनभर निर्जल या फलाहार रखकर किया जाता है, लेकिन इसका समापन चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही होता है. बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए व्रत खोलना अधूरा माना जाता है और इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. अर्घ्य देने का अर्थ है जल, दूध या गंगाजल से चंद्रमा का पूजन करना और उनसे सुख-शांति की कामना करना. यह एक तरह से व्रत की पूर्णता और श्रद्धा का प्रतीक है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!