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उज्जैन से काशी तक: सीएम मोहन यादव की भेंट ‘वैदिक घड़ी’ का पीएम मोदी ने किया अवलोकन, पंचांग और मुहूर्त की मिलेगी सटीक जानकारी

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उज्जैन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को अपने उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का विशेष अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में तैयार यह घड़ी न केवल समय बताती है, बल्कि भारत की प्राचीन और वैज्ञानिक कालगणना को पूरी दुनिया के सामने जीवंत कर रही है।

पीएम मोदी ने समझी कार्यप्रणाली

प्रधानमंत्री ने घड़ी के पास जाकर उसकी कार्यप्रणाली को गहराई से समझा। यह घड़ी पारंपरिक घंटों और मिनटों के बजाय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय पर आधारित है। काशी विश्वनाथ मंदिर में इसे इसी महीने की 4 तारीख को स्थापित किया गया था, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भेंट स्वरूप प्रदान किया था।

क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की खासियत?

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा तैयार की गई यह घड़ी दुनिया की पहली ऐसी डिजिटल घड़ी है जो वैदिक सिद्धांतों पर काम करती है।

  • पूर्ण पंचांग: यह घड़ी समय के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त की सटीक जानकारी देती है।

  • प्राचीन आधार: यह भारत की प्राचीन ‘विक्रमी संवत’ और खगोलीय गणनाओं पर आधारित है।

  • वैज्ञानिक केंद्र: चूँकि उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है, इसलिए यहाँ से की गई कालगणना को वैश्विक स्तर पर सबसे सटीक माना जाता है।

GMT बनाम भारतीय कालगणना: सीएम यादव का दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन को ‘प्राइम मेरिडियन’ (Prime Meridian) के रूप में पुन: स्थापित करने के मिशन पर काम कर रहे हैं। उनका तर्क है कि:

  • जीएमटी (GMT): ग्रीनविच मीन टाइम पश्चिमी सभ्यता का थोपा हुआ पैमाना है, जो रात के 12 बजे से दिन की शुरुआत मानता है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

  • वैदिक गणना: भारतीय संस्कृति में दिन की शुरुआत सूर्योदय से होती है, जो प्राकृतिक और खगोलीय रूप से पूरी तरह तार्किक है।

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