झारखंड के चतरा प्लेन क्रैश के मामले में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है. AAIB टीम ने विमान दुर्घटना की जांच में अहम प्रगति की है. जांच टीम ने दुर्घटना स्थल का दौरा कर जरूरी सबूत इकट्ठे किए और विमान के मलबे की जांच कर महत्वपूर्ण इंजन और अन्य पुर्जों को विस्तृत परीक्षण के लिए मुख्यालय भेजा है.
एयर ट्रैफिक कंट्रोल केंद्रों का दौरा
जांच टीम ने रांची और कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल केंद्रों का भी दौरा कर जरूरी दस्तावेज और जानकारी हासिल की है. मौसम से जुड़ी जानकारी रांची, पटना, रायपुर और कोलकाता एयरपोर्ट के आईएमडी कार्यालयों से लेकर उसका विश्लेषण किया जा रहा है.
अमेरिका-कनाडा को भेजी प्रारंभिक सूचना
AAIB ने ICAO, अमेरिका के NTSB और कनाडा के TSB को भी प्रारंभिक सूचना भेज दी है और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है. जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस जांच का मकसद केवल भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है, किसी पर दोष तय करना नहीं, और यह रिपोर्ट अभी प्रारंभिक है, जिसमें आगे बदलाव संभव है.
अंडमान में भी हेलिकॉप्टर हादसा
बता दें कि 24 फरवरी को अंडमान में भी हेलिकॉप्टर हादसा हुआ था. इस हेलिकॉप्टर में 7 लोग सवार थे. इसमें 2 क्रू और 5 यात्री थे, जिसमें 1 नवजात शामिल था. इस मामले में भी AAIB की प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट सामने आई है. हेलिकॉप्टर दुर्घटना की जांच में एजेंसी ने अहम प्रगति की है. समुद्र से हेलिकॉप्टर का मलबा निकाल लिया गया है और महत्वपूर्ण उपकरण जैसे फ्लाइट डेटा रिकॉर्डिंग यूनिट, इंजन कंट्रोल यूनिट, फेल्योर एनन्सिएटर यूनिट और हेल्थ एंड यूसेज मॉनिटरिंग सिस्टम को सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेजा गया है.
फ्रांस की BEA एजेंसी भी सलाहकारों में शामिल
मलबे को मायाबंदर से श्रीविजय पुरम एयरपोर्ट लाकर सुरक्षित रखा गया है. हेलिकॉप्टर के मेंटेनेंस रिकॉर्ड और क्रू से जुड़े दस्तावेज ऑपरेटर से लेकर उनकी जांच की जा रही है. पायलट और प्रत्यक्षदर्शियों से शुरुआती बातचीत भी की गई है. जांच में फ्रांस की BEA एजेंसी भी तकनीकी सलाहकारों के साथ शामिल हो गई है.
सीट बेल्ट और लाइफ जैकेट का इस्तेमाल
DGCA को सुझाव दिया गया है कि पवन हंस हेलिकॉप्टरों में यात्रियों के सीट बेल्ट और लाइफ जैकेट के इस्तेमाल को सख्ती से सुनिश्चित कराया जाए और सभी हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों की जांच की जाए. पायलटों को जरूरत के अनुसार फ्लोट सिस्टम (आपात स्थिति में पानी पर उतरने के उपकरण) इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करने के निर्देश देने की भी सिफारिश की गई है.
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