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इंदौर में अफसरशाही वर्सेस जनप्रतिनिधि,मेयर मुखर,अन्य नेताओं की चुप्पी,पीसा रही जनता,दबे मुंह अब भाजपा में चर्चा ऐसे तो पार्टी की स्थिति हो जाएगी ख़राब!

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इंदौर में अफसर वर्सेस जनप्रतिनिधि,,
अफसरशाही हावी,भाजपा नेता परेशान,महापौर मुखर,लेकिन अन्य नेताओं की चुप्पी, दबे मुंह भाजपा नेताओं में बात,जनता बेहाल कैसे किस मुंह से दें जवाब,कभी कोई हादसा,कभी कांड, महाजाम नगर की समस्याएं बरकरार।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

भाजपा में फिलहाल राजनीतिक समीकरण असंतुलित हो गया हैं। जबकि इंदौर में अफसर वर्सेस जनप्रतिनिधि की स्थिति साफ़ तौर पर देखी जा सकती हैं। लेकिन इस पूरे तमाशे के बीच इंदौर की आम जनता पिसा रही हैं। क्योंकि भागीरथपुरा में जो हुआ,उसके अलावा शहर के अन्य क्षेत्रों में जो स्थितियां भांपी जा रही हैं। उसे देखते हुए अब जनप्रतिनिधियों और अफसरशाही की इस लड़ाई में जनता का सत्यानाश हो रहा हैं। बातों ही बातें में भाजपा के आगामी भविष्य तक पर शहरभर में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

लगभग पूरे इंदौर के विधायक,मेयर,मंत्री,पार्षद सभी इंदौर में काबिज हो चुकी अफसरशाही से तंग आ चुके हैं। और इसका सीधा परिणाम भागीरथपुरा में हुए भयावह घटनाक्रम में देखा गया।

कई दिनों से उबल रहा था गुस्सा,जनता पर आई तो फूट रहा बम

दरअसल पिछले लंबे समय से इंदौर शहर और नगर निगम में मेयर,पार्षदों और अफसरों के बीच कुछ अच्छा नहीं घट रहा हैं। क्योंकि जनता जनप्रनिधियों की जान खाती है और अफसर कई बार तो ऐसे मामलों में लोगों को चक्कर खिलवाते है या फिर उन नगर निगम के जिम्मेदारों के ही फोन तक नहीं उठाते हैं। ऐसे सभी हालातों के चलते जनता तो बर्बाद होनी ही हैं। वह कहते है न बागड़ का ही नुकसान हमेशा से होते आया हैं।

मेयर मुखर और अन्य नेता कुंठित,परिणाम मुद्दा ही अलग।

इंदौर में ट्रक कांड हो या फिर अब ये भागीरथपुरा का हादसा जिसमें जिंदगियां काल का ग्रास बन गई हैं। एक तरफ मेयर,मीडिया और अधिकारियों में मौतों के आंकड़ों को लेकर ही बड़ा मतभेद है तो दूसरी तरफ मेयर पुष्यमित्र भार्गव अब मुखर है वह फिर एसीएस संतोष दुबे के सामने इंदौरी अधिकारियों की लू उतारना हो,या फिर अब सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव से निष्कर्ष की बात कहना हो। मगर अन्य भाजपा नेताओं मुंह बंदी की वजह से जनता गुनहगार होते हुए सजा भुगत रही हैं। इधर खुद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के ऐसे राजनीतिक उथल पुथल वाले माहौल के बीच अपना आपा खो ही चुके हैं। जनता की चिंताओं के बीच पत्रकार को बोलना अब वह खुद ही स्तब्ध हैं। 

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