इंदौर नगर निगम के हठधर्मी अधिकारी लाचार भाजपाई जनप्रतिनिधि,और हो गया भागीरथपुरा कांड,यह तो शुरुआत है शहर के अन्य क्षेत्रों में अभी होना शेष हैं, एक ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को किसने दिए इतने विभाग,जबकि नहीं संभल कार्य,नगरीय प्रशासन मंत्री सार्वजनिक रूप कर चुके है सीएम को ऐसे अधिकारियों की शिकायत।
हठधर्मी इंदौर नगर निगम अधिकारी,लाचार भाजपाई जनप्रतिनिधि, और हो गया भागीरथपुरा कांड, यह तो शुरुआत है अभी और कांड होना बाकी है,क्योंकि एक ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को मलाईदार विभाग लेकिन निगम एडिशनल कमिश्नर से नहीं संभल रहा काम,कार्यशैली को लेकर इंदौरी नेताओं में जमकर नाराजी।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
भागीरथपुरा में जो हुआ वो किसी से छुपा नहीं दूषित पेयजल ने आम आदमियों की जिंदगियों को काल ग्रास बना दिया। लेकिन सिर्फ भागीरथपुरा में ही ऐसा कांड होगा। यह सिर्फ अभी शुरुआत मानिए क्योंकि लगभग पूरे शहरभर से दूषित पेयजल सप्लाई की शिकायत आ रही हैं। इधर इंदौर नगर निगम के हठधर्मी अधिकारी जिनमें निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव,अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया,और जलप्रदाय के अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव जो अब अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं। क्योंकि सीधे तौर पर यह कहना गलत नहीं होगा कि इन्हीं अधिकारियों की हठधर्मिता की वजह से हो भागीरथपुरा कांड हुआ हैं। क्योंकि पिछले लगभग एक वर्ष से उक्त क्षेत्र की पेयजल लाइन को लेकर तकनीकी टीमें अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को चेता रही थी कि अगर उक्त क्षेत्र की पेयजल लाइन को दुरुस्त नहीं किया गया तो फिर ऐसा हादसा हो सकता हैं। और अब पिछले साल में उक्त क्षेत्र ऐसे हादसे का साक्षी बन ही गया हैं। इधर इंदौर नगर निगम के हठधर्मी अधिकारियों की वजह से इंदौरी जनप्रतिनिधि जिनमें खुद मेयर पुष्यमित्र भार्गव और तो और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय लाचार नजर आ रहे हैं। खास बात तो यह है कि खुद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव को इंदौर नगर निगम अधिकारियों को लेकर सार्वजनिक रूप से बोल चुके है कि मुख्यमंत्री के नाम पर ऐसे हठधर्मी अधिकारी इंदौरी नेताओं को चमकाते हैं। लेकिन अब सवाल आम जनता का हैं जो ऐसे हठधर्मी अधिकारियों को मुख्यमत्री डॉक्टर मोहन यादव के खुले संरक्षण के चलते पीसा रही है यही नहीं अब तो इंदौरी जनता की जान तक पर बन आई हैं।
केवल एक ही अपर आयुक्त जिन्हें मिले इतने विभाग।

इंदौर नगर निगम अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को लेकर इंदौरी नेताओं का गुस्सा इस बात पर भी है कि केवल एक ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को इतने ज्यादा विभाग थोक में दे दिए हैं। जो यकीनन उनकी सहन शक्ति से बाहर हो रहे हैं। क्योंकि अगर अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया इन सभी विभागों का क्रियान्वयन अच्छे से करते तो भागीरथपुरा क्षेत्र में ऐसा जानलेवा हादसा होना मुमकिन नहीं था। क्योंकि जिस वजह से भागीरथपुरा में हादसा हुआ और आम जनता की जानें गई। ऐसा होता ही नहीं। वह इसलिए क्योंकि उक्त इसी पेयजल लाइन को बदलने का टेंडर अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया की टेबल पर धूल खा रहा हैं। और उनकी हठधर्मिता की वजह से भागीरथपुरा के लोगो ने अपनी जान गंवा दी।
कार्यशैली पहले से ही चर्चाओं में।

अगर अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया की कार्यशैली की बात की जाए तो अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया किसी को कुछ नहीं समझते हैं। फिर वह आम जनता हो या
जनप्रतिनिधि। किसी का फोन, किसी से मिलने की वह जरूरत ही नहीं समझते हैं।
निगम आयुक्त भी है संदेह के घेरे में।

इधर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव भी भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए हादसे को लेकर कहीं न कहीं संदेह के घेरे में हैं क्योंकि इतने महीनों गुजर जाने के बावजूद भी भागीरथपुरा की फाइल धूल खाती रही हैं। और जब भागीरथपुरा में हादसा हुआ तो ताबड़तोड़ उक्त फाइल को रॉकेट की गति से चलाते हुए स्वीकृति तक मिल गई।
मंत्री ने खुले तौर पर बोला था अधिकारी चमकाते हैं।

इंदौर नगर निगम अधिकारी कितने हठधर्मी हैं। और उन्हें खुद मुख्यमत्री डॉक्टर मोहन यादव का कितना संरक्षण हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव को शिकायत कर चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी ऐसे अधिकारियों का बाल तक बांका नहीं हुआ।
केवल विधानसभा एक नहीं लगभग पूरे शहर से आ रही शिकायतें।

दरअसल भागीरथपुरा केवल एकमात्र क्षेत्र नहीं हैं। जहां फिलहाल निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव लीपापोती करने में लगे हुए हैं। क्योंकि लगभग पूरे शहरभर से दूषित पेयजल सप्लाई की शिकायत नगर निगम पहुंच रही है या उसके पूर्व भी पहुंची हैं। लेकिन भागीरथपुरा हादसे के पहले कोई भी इंदौर नगर निगम अफसर जागा ही नहीं था।