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राजस्व में बढ़ोत्तरी,निगम अमले की वसूली,लेकिन इजाज़त किसी की प्रापर्टी में घुस जाना है अपराध,महापौर के मना करने के बावजूद कराई FIR, बनाया राजनीतिक मुद्दा,अब मेयर पूरी MIC आम जनता के साथ तो अकेले पड़ गए निगम कमिश्नर यादव।

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राजस्व का इजाफा करने गए या फिर वसूली, आम जनता का आरोप तथाकथित निगमकर्मचारी मांग रहे थे रिश्वत।

निगम कमिश्नर कर्मचारियों की
हठधर्मिता की वजह से बन गया राजनीतिक मुद्दा।
कानून कहता है बिना किसी की इजाजत के कोई भी किसी की निजी संपत्ति में दखलंदाजी नहीं कर सकता। न नोटिस, न सूचना सीधे शुरू की नपती।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

भंवरकुआ थाना पर जो शनिवार देर रात तक तमाशा हुआ। उसे लेकर अलग अलग तरीके के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन जिस तरह से निगम कर्मचारी शैलेन्द्र सिंह और अन्य निगम अमले ने इस पूरे मामले की शुरुआत की। उसके देखते हुए कानून जो कहता हैं। उसके तहत निगम अधिकारी और कर्मचारी ही पहले दोषी हैं। जिन्होंने उक्त छोटे से मामले को अपनी बपौती समझते हुए बड़ा रूप दे दिया। फिलहाल निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव और मेयर पुष्यमित्र भार्गव की आपसी लड़ाई का इसे चोला उड़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन भारतीय न्याय संहिता की धारा 331 के तहत निगम अधिकारी शैलेंद्र सिंह और अन्य कर्मचारी। बिना किसी की इजाजत लिए। बिना पूर्व सूचना, या नोटिस दिए किसी की निजी संपत्ति में प्रवेश कर गए। और उन्होंने जो छोटे से विवाद करते हुए निगम कमिश्नर की एक अच्छी मुहिम को बदनाम कर दिया। क्योंकि आम जनता स्थानीय लोग निगम अधिकारियों पर हाथों हाथ मामला सेटल करने के एवज में 20 हजार रुपए रिश्वत मांगे जाने तक के आरोप लगा रहे हैं। इधर इस पूरे मामले में MIC सदस्य बबलू शर्मा को थाने से कुछ ही दूरी पर अज्ञात वाहन सवार दो युवकों द्वारा जान से मारने की धमकी दिए जाना भी पुलिस सिस्टम पर सवाल उठा रहा हैं। क्योंकि MIC सदस्य बबलू शर्मा द्वारा बार बार FIR दर्ज किए जाने की गुहार लगाने के बावजूद भी शिकायत न होते हुए मात्र शिकायत आवेदन लेना पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल उठा रहा हैं।

बिना अनुमति कैसे घुसा निगम अमला।

भंवरकुआ क्षेत्र में जो शनिवार को घटनाक्रम शुरू हुआ। उसकी मुख्य वजह खुद निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव,aro शैलेन्द्र सिंह सहित अन्य निगम अमला हैं। क्योंकि वह संपत्तियों की नपती के लिए पहुंचे तो थे। लेकिन इसके पूर्व अमले ने स्थानीय ऐसे लोगों को कोई सूचना नहीं दी थी। न ही कोई नोटिस, जबकि निगम अमला सीधे लोगों के घरों में घुस गया और उनकी संपत्तियों की नपतियां करनी शुरू कर दी। जो कि कानूनन गुनाह हैं। BNNS की धारा 331 के तहत कोई भी व्यक्ति,सरकारी अमला बिना सूचना के इस तरह के कृत्य नहीं कर सकता हैं।

गलती निगम अमले की टारगेट बन गए कमिश्नर।

कमिश्नर दिलीप कुमार यादव ने निगम राजस्व अमले को मौजूदा संपत्ति कर खातों की जांच और उनमें गड़बड़ी होने की स्थिति में जांच करने के आदेश दिए थे। लेकिन आनन फानन में निगम अमले ने जो वार्ड 74 में कर दिया। उसकी वजह से अब निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव टारगेट होते हुए बदनाम हो रहे हैं।

महापौर ने किया था मना।

बताया जा रहा है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने वार्ड 74 में हुए घटनाक्रम के बाद निगम अमले और खुद निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को उक्त मामले में कोई भी कानूनी कार्रवाई करने से मना किया था। क्योंकि महापौर पुष्यमित्र भार्गव जानते थे कि कानूनन निगम अमला ही उक्त मामले में गलत हैं। लेकिन उनकी किसी ने चलने नहीं दी। जबकि अब यह मुद्दा कुछ नासमझो की वजह से बड़ा रूप ले चुका हैं। क्योंकि पूरी MIC खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव भंवरकुआ की स्थानीय जनता के साथ खड़े हो गए है तो इधर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव अब अकेले पड़ गए हैं।

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