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सराफा चौपाटी, हक़ीक़त हैं खानपान-सोना चांदी दोनों से है, सराफा की देशभर में पहचान, असल वजह वो दुकानें,दुकानदार जिन्हें सता रही अब ओटलों के किराए की चिंता।

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मामला सराफा चौपाटी का,ओटला किराया मुख्य मुद्दा,80 दुकानदारों को कोई एतराज नहीं। हकीकत यह कि खानपान और सोना चांदी से है सराफा पहचान।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

सराफा चौपाटी को लेकर स्थानीय विधायक मालिनी गौड ने व्यापारियों को समन्वय बनाते हुए कुल 80 दुकानों को सराफा चौपाटी में शामिल करने की बात साफ कर दी है। जबकि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आम जनता की सिफारिशों के चलते अब सराफा चौपाटी वहीं लगाने पर अपनी सहमति दे दी है। लेकिन इस पूरे मामले में खुद सराफा से ही जुड़े विश्वनीय सूत्र बताते है कि सराफा चौपाटी का विरोध वह लोग कर रहे हैं जिन्हें अब अपने ओटलों का किराया मिलना संभव नहीं होगा। लिहाजा उन्होंने कुछ व्यापारियों को आगे करते हुए सराफा चौपाटी का विरोध दर्ज करवाना शुरू कर दिया है।

हकीकत यह हैं

दरअसल सराफा से जुड़े वह ऐसे व्यापारी है, जो अपने ओटलों का पिछले लम्बे समय से मनमाना किराया वसूलते आ रहे थे। जिसकी वजह से सराफा चौपाटी दिन प्रतिदिन छोटी होती गई। और अब विवादों में घिर गई हैं। जबकि परंपरागत दुकानों की बात की जाए तो यह महज 80 से ज्यादा नहीं हैं। जबकि ऐसी दुकानें बहुत ज्यादा है जो परेशानी और आपत्ति की मुख्य वजह हैं।

नगर निगम को दी थी सहमति।

इधर बताया जा रहा है कि जो सराफा व्यापारी फिलहाल चौपाटी का विरोध कर रहे हैं। उन्हीं व्यापारियों के संगठन नगर निगम को बकायदा लिखित सहमति प्रदान कर चुके हैं। लेकिन अब मामला विवादित होने पर विरोध में शामिल हो गए हैं।

दोनों ही सराफा की देश में पहचान।

सराफा चौपाटी की ख़ाउ गली हो या परम्परागत खानपान की दुकानें और सराफा की सोना चांदी की दुकानें दोनों ही देशभर में मशहूर हैं। इन्हीं दोनों के समय को लेकर कभी कोई विवादित स्थिति नहीं बनी। क्योंकि सोना चांदी दुकानों का एक अलग समय निर्धारित है तो खानपान की दुकानों का भी समय तय हैं। लिहाजा इसके पहले कभी कोई विवादित स्थिति नहीं बनी हैं।

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