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Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा में घोड़ों-खच्चरों के संचालन पर सख्त नियम; सरकार ने जारी की नई SOP

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उत्तराखंड: चारधाम यात्रा मार्गों पर पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता और अव्यवस्थाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पशुपालन विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जिसके तहत केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश मार्गों पर पशुओं की आवाजाही के लिए नियम कड़े कर दिए गए हैं। हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है।

📊 पशुओं की संख्या पर लगी सीमा

नई व्यवस्था के तहत, मार्गों पर एक दिन में अधिकतम घोड़ों-खच्चरों की संख्या तय कर दी गई है:

  • केदारनाथ मार्ग: अधिकतम 5,000

  • हेमकुंड साहिब मार्ग: अधिकतम 1,050

  • यमुनोत्री मार्ग: अधिकतम 595 साथ ही, सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच जानवरों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी और यात्रा टोकन केवल सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही जारी किए जाएंगे। खराब मौसम या बर्फबारी के दौरान संचालन पर रोक रहेगी।

📑 रजिस्ट्रेशन और स्वास्थ्य जांच अनिवार्य

अब बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी घोड़ा-खच्चर मार्ग पर नहीं चल सकेगा। सभी पशुओं का जिला पंचायतों में सालाना रजिस्ट्रेशन और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य होगी। साथ ही, ‘ग्लैंडर्स रोग’ की जांच और स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी है। जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र केवल 45 दिनों तक ही वैध माना जाएगा।

🚫 पशु क्रूरता पर अब होगी FIR

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बीमार या घायल पशुओं से काम लेने, अत्यधिक बोझ डालने या उन्हें जबरन दौड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। हर पशु के साथ एक हैंडलर का होना अनिवार्य है और एक मालिक केवल दो ही जानवर संचालित कर सकेगा। इन नियमों का उल्लंघन करने पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषी का लाइसेंस रद्द करने, उसे ब्लैकलिस्ट करने और आपराधिक FIR दर्ज करने तक की सख्त व्यवस्था की गई है।

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