World News: होर्मुज से भी बड़े समुद्री रास्ते को ब्लॉक करने की तैयारी में चीन, साउथ चाइना सी के एंट्री गेट पर लगाए बैरिकेड्स
चीन समंदर में होर्मुज से भी बड़े रास्ते को ब्लॉक करने की तैयारी में है. दरअसल, फिलीपींस और जापान से विवाद के बीच चीन ने साउथ चाइना सी के प्रवेश द्वार को आंशिक रूप से ब्लॉक करने की तैयारी शुरू कर दी है. चीन की कोशिश इसके प्रवेश द्वार को कंट्रोल में लेने की है. इसके लिए उसने स्कारबोरो शोल के पास जहाजों की तैनाती शुरू की है. चीन जहाजों के जरिए इसके प्रवेश द्वार को बंद कर सकता है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सैटेलाइट इमेज के जरिए इसका खुलासा किया है. इमेज में देखा जा रहा है कि कैसे चीन साउथ चाइना सी के एंट्रेंस गेट पर अवरोधक लगा दिया है, जिससे इस रास्ते से उसके निगरानी के बिना कोई भी जहाज आसानी से न गुजर सके.
कैसे ब्लॉक कर रहा है साउथ चाइना सी?
Ventor सैटेलाइट इमेज से जो तस्वीर सामने आई है, उसके मुताबिक चीन ने साउथ चाइना सी के प्रवेश द्वार को ब्लॉक करने के लिए एक अवरोधक, एक जहाज और 4 मछली पकड़ने वाले नावों को लगाया है. इन्हें ऐसे तैनात किया गया है, जिससे पूरे इलाके की बैरिकेडिंग हो जाए.
जानकारों का कहना है कि चीन के इस कदम से इस इलाके में तनाव पैदा हो सकता है, क्योंकि यहां पर फिलीपींस पहले से अपना दावा करता रहा है. हालांकि, बैरिकेडिंग को लेकर चीन ने आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
फिलीपीन तटरक्षक बल के प्रवक्ता जे टैरिएला का कहना है कि चीन ने इस इलाके में 352 मीटर का अवरोधक स्थापित किया है. इसके अलावा चीन ने यहां पर पानी के भीतर 6 पनडुब्बियों को तैनात किया है. चीन पूरी तरह से इसे कंट्रोल में लेना चाहता है.
बड़ा सवाल- दुनिया के लिए यह क्यों अहम है?
पूरी दुनिया के कुल व्यापार का 33 प्रतिशत साउथ चाइना सी के जरिए होता है. अगर इसे ब्लॉक या कंट्रोल किया जाता है तो पूरी दुनिया में त्राहिमाम की स्थिति हो सकती है. सिंगापुर, फिलीपींस, जापान, चीन और ताइवान जैसे देश इसी रास्ते से अपना व्यापार करता है. इस द्वीप के अधिकांश हिस्सों पर पहले से ही चीन का कब्जा है, लेकिन हाल के दिनों में कृत्रिम द्वीप बनाकर चीन इसे पूरी तरह से कंट्रोल करना चाहता है.
अब चीन ने जिस तरीके से दक्षिण चीन सागर के प्रवेश द्वार पर अवरोधक लगाए हैं, उससे सवाल उठ रहे हैं. चीन की कोशिश इसे अपने कंट्रोल में लेने की है. 2016 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फिलीपींस के दावे को मानते हुए कहा था कि यह द्वीप चीन का नहीं है.
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