इंदौर नगर निगम जलकार्य विभाग की अजीबोंगरीब नदी सफाई,कभी काम भी पूरा न होवे,और करोड़ो रुपए बजट भी खप जाए,एक तरफ निकल रही गाद,दूसरी तरफ से वापस नदी में विसर्जित।
नगर निगम,नाला सफाई बजट खपाने का नायाब तरीका।
जलकार्य विभागीय अधिकारियों की बड़ी जादूगरी,नाला सफाई पर उठ रहे बड़े सवाल,नाले की गाद फिर नाले में,और फिर हो रही सफाई, नगर निगम जलकार्य विभाग का नाला सफाई का अपना अजीबो गरीब तरीका।
✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।
इंदौर नगर निगम के जिम्मेदार जिनमें निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल,अपर आयुक्त की लंबी चौड़ी फौज हो या फिर इंदौर नगर निगम के जलकार्य विभागीय अधिकारी। सभी सो रहे है। या फिर उन्होंने शहर की जनता को ही पूरी तरह से मूर्ख समझ रखा हैं दरअसल वह इसलिए क्योंकि जिस तरह से इंदौर नगर निगम जलकार्य विभाग नाला सफाई कर रहा हैं। वह यहां से गुजर रहा बच्चा भी समझ जाएगा कि इंदौर नगर निगम में झोल ही झोल हैं आमजनता से टैक्स के रूप में वसूला गया करोड़ो रुपया इंदौर नगर निगम के जिम्मेदार किस तरह से पानी में बहा रहे हैं। क्योंकि इंदौर नगर निगम का
जलकार्य विभाग जिस तरह से नदी सफाई और गाद निकाल रहा है। उसे लेकर इंदौर नगर निगम के जिम्मेदारों को राष्ट्रपति अवार्ड दिया जाना चाहिए। वह इसलिए कि जलकार्य विभागीय अमला एक तरफ से नदियों की सफाई कर रहा है और वहीं दूसरी तरफ से इसी नदी में सुख चुकी गाद वापस नदी में फेंक रहा हैं। लिहाजा यह कहना गलत नहीं होगा कि काम तो बस निगम बजट की बरबादी करने का है न कि निगम के जिम्मेदार नदियों की सफाई में कोई खास दिलचस्पी ले रहे हैं।
कृष्णपुरा छत्री से गुजर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देखा,निगम कमिश्नर, अपर आयुक्त को लगाया फोन,लेकिन किसी को परवाह नहीं।
इंदौर के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिवसेना कार्यकर्ताओं को जब उक्त मामले की भनक लगी तो उन्होंने कृष्णपुरा छत्री पर चल रहे नदी शुद्धिकरण का काम रुकवा दिया। जबकि उन्होंने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा से लेकर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल को उक्त मामले की जानकारी और शिकायत करनी चाही लेकिन इन जिम्मेदार अफसरों ने फोन उठाना ज़रूरी नही समझा।
अभी तक 2000 करोड़ रुपए बहाए नदियों की सफाई में।
दरअसल इंदौर नगर निगम के जलकार्य विभाग ने शहर की नदियों के शुद्धिकरण के लिए अभी तक 2000 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च कर दी हैं। लेकिन नतीजा क्या है यह आप कृष्णपुरा छत्री पर आकर देख सकते है कि किस तरह से जिम्मेदार काम के नाम पर मात्र बजट खपाने में लगे हुए हैं।