आठ बार नंबर एक इंदौर की स्वच्छता की साख पर सवाल,थोपे अधिकारियों से नहीं बनेगी बात,इंदौर को समझने वाले की दरकार,अन्य क्षेत्रों में भी गंदे जल की शिकायत,मगर अन्य विधायकों ने साधी मात्र चुप्पी।
इंदौर,स्वच्छता की साख पर सवाल,थोपे गए अफसरों ने बिगाड़ी व्यवस्थाएं,उधर ऊंट पर बैठकर विपक्ष,पूर्व मुख्यमंत्री का जमीन नापने का प्रयास। सिर्फ नगर निगम ही नहीं अन्य कई और विभाग जहां अभी भी कायम अफसरशाही।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए भयावह हादसे में 15 लोग अपनी जानें गंवा चुके हैं। या कहे कि अफसरी लापरवाहियों की भेंट चढ़ चुके हैं, और काल का ग्रास बन गए हैं। लेकिन भागीरथपुरा के उक्त कांड ने आठ बार स्वच्छता में नंबर वन इंदौर की स्वच्छता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि उक्त हादसे के पूर्व इसी नाला टैपिंग,सीवरेज लाइन,सीवरेज मैनेजमेंट के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई से इकठ्ठा किए अरबों रुपयों की बलि चढ़ा दी गई। लेकिन न नदियां साफ हुई, न ही नगर निगम का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट कोई खास कारगार साबित हुआ। क्योंकि आखिरकार भागीरथपुरा की जनता ने तो गटर का पानी पिया। खैर भागीरथपुरा जैसे हालात केवल भागीरथपुरा में ही नहीं हैं। बल्कि राऊ, दो नंबर ,पांच नंबर, चार नंबर और तीन नंबर विधानसभा क्षेत्रों में भी बने हुए हैं। उक्त विधानसभा क्षेत्रों के कई इलाकों मेें अभी भी दूषित, मतमैला पानी सप्लाई हो रहा हैं। और सच्चाई तो यह भी है कि समझदार लोग नगर निगम नर्मदा जल की बजाय वर्षों से बोरिंग का पेयजल ही उपयोग कर रहे हैं।

थोपे गए अफसर कभी चले नहीं।

मोहन सरकार ने इंदौर को जिस तरह से पिछले कुछ समय में अफसर दिए। उनमें इंदौर को समझू अफसर ही इंदौर में टिक पाया। लेकिन थोपे गए और इंदौर को नहीं समझने वाले अफसर इंदौर में कभी चले नहीं हैं। उनकी रवानगी हो ही गई हैं। लिहाजा इंदौर नगर निगम में ही ऐसे अफसर नहीं है बल्कि अन्य विभागों में भी इंदौर को नहीं समझने वाले अफसर पदस्थ कर दिए गए हैं। जिनकी वजह से सीधे तौर पर मोहन सरकार की साख पर आ रही हैं।

आखिरकार अन्य विधायक चुप क्यों

न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम ने विधानसभा एक के बाद, दो ,तीन, चार और राऊ विधानसभा के कई रहवासियों से चर्चा की। और उक्त चर्चा में जो स्थिति सामने आई वह चौंकाने वाली थी। क्योंकि इन विधानसभा क्षेत्रों के कई क्षेत्र ऐसे है जहां गंदा पानी ही पिछले लंबे समय से सप्लाई हो रहा हैं। यहीं नहीं लोगो ने नगर निगम के जिम्मेदार अफसर, पार्षदों और खुद विधायकों को इसकी शिकायत की थी। लेकिन थक हारकर रहवासियों ने ही नगर निगम के नर्मदा जल से किनारा कर लिया। लेकिन फिर भी विधायक रमेश मेंदोला,मालिनी गौड,गोलू शुक्ला और मधु वर्मा का इतने बड़े कांड होने के बावजूद मात्र चुप रहना। जनता के प्रति उनकी चिंताओं को साफ साफ प्रकट कर रहा है कि उन्हें कोई चिंता नहीं है जनता की।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का तंज,कांग्रेस की नेतागिरी।

इधर इंदौर में हुए पूरे घटनाक्रम के बाद मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इंदौर के नेताओं को कठघरे में खड़ा किया। लेकिन यह ट्वीट मात्र ऊंट पर बैठकर बकरी चराने जैसा या जमीन नापने जैसा साबित हो रहा है। क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी कई बार गंगा सफाई को लेकर अफसरशाही के खिलाफ मुखर हुई हैं। धरने तक पर बैठ चुकी हैं। खैर वह कहते है न कि घायल की दशा घायल ही जानता हैं। इधर कांग्रेस भी नौटंकियां करने से पीछे नहीं हट रही हैं। क्योंकि खुद कांग्रेस के पार्षदों के वार्डो में रहवासी गंदे पानी की शिकायत करते आ रहे हैं। लेकिन रहवासियों की माने तो खुद कांग्रेसी पार्षद ही ऐसे मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं देते आए हैं।