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IDA के अंगद संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव,कांड हो जाए तो ही जिम्मेदारों को याद आते नियम कायदे,वरना सालों तक खाते रहते है मलाई।

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नगर निगम के अंगद संजीव श्रीवास्तव,तो इंदौर विकास प्राधिकरण के मनीष श्रीवास्तव। किसी को कुछ पड़ी नहीं कोई कांड हो तो ही जिम्मेदार लेते सुध,वरना सालों तक खाते रहते है मलाई।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

इंदौर नगर निगम हो या फिर इंदौर विकास प्राधिकरण या अन्य कोई भी विभाग। यहां राज्य सरकार के तमाम नियम कायदों को ठेंगा दिखाना कोई बड़ी बात नहीं हैं। अगर फिर कोई कांड या कोई बड़ा मामला होता है तो ही जिम्मेदार ऐसे वर्षों से जमे अंगदो की सुध लेते हैं। नहीं तो वर्षों तक ऐसे अफसर मलाई छानते रहते हैं। लेकिन किसी को नियम कायदे की कोई परवाह नहीं होती। क्योंकि एक तरफ नगर निगम नर्मदा जलप्रदाय के सस्पेंडेड अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव हैं। जो 13 वर्षों से भी अधिक समय से इंदौर नगर निगम में एक ही विभाग में जमे हुए थे। इस दौरान संजीव श्रीवास्तव की कार्यशैली के खिलाफ कई धरने प्रर्दशन हुए। लेकिन भागीरथपुरा कांड हुआ तब कहीं जाकर जिम्मेदारों को संजीव श्रीवास्तव की याद आई और उनके इंदौर में इतने लंबे कार्यकाल की। ऐसे ही दूसरे अफसर है इंदौर विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव जो कि पिछले दस से ज्यादा सालों से इंदौर में ही जमे हुए हैं। हालांकि इस बीच मनीष श्रीवास्तव का तबादला भी हुआ। लेकिन खुद इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने सरकार से मनीष श्रीवास्तव से संबंधित जानकारी देना ही उचित नहीं समझा।

इतने सालों तक जमे रहना आखिर किसकी मेहरबानी।

इंदौर विकास प्राधिकरण में संपदा अधिकारी बनकर बैठे मनीष श्रीवास्तव किसी न किसी विवाद में रहे हैं। इस दौरान श्रीवास्तव की कार्यशैली को लेकर कई खुलासे भी हुए लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी मनीष श्रीवास्तव का बाल तक बांका नहीं कर पाए। बल्कि मनीष श्रीवास्तव बिंदास IDA में ही जमे हुए हैं।

पूर्व में हो चुका ट्रांसफर।

इंदौर विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव का तबादला हो चुका हैं। लेकिन पिछले लंबे समय से श्रीवास्तव को इंदौर विकास प्राधिकरण से रिलीव तक करने की किसी की हिम्मत नहीं हैं बल्कि मनीष श्रीवास्तव बेखौफ मनमर्जी से इंदौर विकास प्राधिकरण में जमे हुए हैं।

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